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विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा जरूरी : राज्यपाल

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विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा जरूरी : राज्यपाल


गुवाहाटी, 04 नवंबर (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने बुधवार को गुवाहाटी स्थित प्रागज्योतिषपुर विश्वविद्यालय में तीसरे पूर्वोत्तर शिक्षा सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और समग्र शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया।

‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को साकार करना : क्रियान्वयन से बेहतर परिणाम तक’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के कुलपति, निदेशक, प्राचार्य, शिक्षाविद और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।

अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के चरित्र निर्माण, समाज को मजबूत बनाने और राष्ट्र के विकास की आधारशिला भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान, मूल्यों, रचनात्मकता, अनुशासन और चरित्र निर्माण को समान महत्व दिया जाना चाहिए।

आचार्य ने पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, बौद्धिक क्षमता और प्राकृतिक संपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व वाली असम सरकार की ओर से मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग संस्थानों और विश्वविद्यालयों के माध्यम से शैक्षणिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों की सराहना की।

राज्यपाल ने ग्रामीण, जनजातीय, दूरदराज और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बालिका शिक्षा, तकनीकी कौशल और नेतृत्व विकास को भी महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने शिक्षाविदों से पूर्वोत्तर की विशिष्ट चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार-विमर्श करने का आग्रह किया। इनमें बार-बार आने वाली बाढ़, जलवायु परिवर्तन, कृषि उत्पादकता, चाय उद्योग का आधुनिकीकरण, औषधीय पौधों पर अनुसंधान और जैव विविधता का संरक्षण प्रमुख हैं।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल ने घोषणा की कि प्रागज्योतिषपुर विश्वविद्यालय में चालू शैक्षणिक सत्र से प्रागज्योतिषपुर आयुर्वेद गुरुकुलम की शैक्षणिक गतिविधियां शुरू होंगी। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त यह कार्यक्रम देश के केवल पांच संस्थानों में संचालित होगा। पूर्वोत्तर में प्रागज्योतिषपुर विश्वविद्यालय एकमात्र संस्थान होगा, जहां यह शिक्षा उपलब्ध होगी।

उद्घाटन समारोह में राष्ट्रीय शिक्षा नीति समीक्षा समिति के अध्यक्ष एवं प्रख्यात शिक्षाविद प्रो. एम. जगदीश कुमार, विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा, कुलपति प्रो. राघवेन्द्र पी. तिवारी, कुलसचिव डॉ. देबब्रत खनिकर सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश