गुवाहाटी में संत महासम्मेलन में शामिल हुए राज्यपाल, बोले- शांतिपूर्ण समाज की नींव है आध्यात्मिक ज्ञान
गुवाहाटी, 03 अक्टूबर (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने गुवाहाटी में ‘आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से भारतीय संस्कृति का पुनरुत्थान’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय संत महासम्मेलन का उद्घाटन किया। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा सोनाराम एचएस स्कूल के खेल मैदान में महासम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि संतों और आध्यात्मिक नेताओं की उपस्थिति ने महासम्मेलन को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को आत्मचिंतन, सद्भाव और मानव कल्याण की दिशा में प्रेरित करते हैं। वर्तमान समय में तेजी से हो रहे तकनीकी और सामाजिक बदलावों के बीच महासम्मेलन का विषय अत्यंत प्रासंगिक है।
आचार्य ने भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की ज्ञान परंपरा हमेशा आध्यात्मिकता, मूल्यों, सेवा और मानव कल्याण पर आधारित रही है। भारतीय संस्कृति सिखाती है कि ज्ञान के साथ विनम्रता, शक्ति के साथ आत्मसंयम, समृद्धि के साथ सेवा और अधिकारों के साथ कर्तव्यबोध होना चाहिए।
असम की आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता दुनिया से विमुख होने का मार्ग नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति की खोज, मन के अनुशासन और जीवन को अधिक सार्थक बनाने की यात्रा है।
राज्यपाल ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अभूतपूर्व प्रगति के बावजूद आज लोगों को शांति, संतुलन, भावनात्मक जुड़ाव और सद्भाव की आवश्यकता है। आध्यात्मिकता सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन, करुणा और आंतरिक शांति को बढ़ावा देकर यह संतुलन स्थापित करने में मदद कर सकती है।
उन्होंने राजयोग, ध्यान, नैतिक जीवन, सकारात्मक सोच और आत्मअनुशासन को बढ़ावा देने तथा युवाओं को जीवन-मूल्यों से जोड़ने के लिए ब्रह्मकुमारी संस्था के योगदान की सराहना की।
आचार्य ने आधुनिक विकास के साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश की प्रगति सभ्यतागत मूल्यों और आध्यात्मिक शक्ति में निहित रहनी चाहिए। उन्होंने महासम्मेलन के आयोजन के लिए ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय को बधाई दी और उम्मीद जताई कि यह आयोजन आध्यात्मिक जागृति, सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को और मजबूत करेगा।
महासम्मेलन में श्रीश्री औनीआटी सत्र (मठ) के सत्राधिकार डॉ. पीतांबर देव गोस्वामी, अयोध्या धाम के जगद्गुरु रामानंदाचार्य, अयोध्या धाम के आशुतोष महाराज, राजयोगिनी बी.के. मनोरमा सहित अन्य संत, आध्यात्मिक व्यक्तित्व, ब्रह्मकुमारी संस्था के पदाधिकारी तथा विभिन्न सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संगठनों के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

