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बांग्लादेश भेजी गई नगांव की दो महिलाओं को तलाशकर वापस लाने की मांग, गौरव गोगोई ने विदेश मंत्री को लिखा पत्र

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बांग्लादेश भेजी गई नगांव की दो महिलाओं को तलाशकर वापस लाने की मांग, गौरव गोगोई ने विदेश मंत्री को लिखा पत्र


गुवाहाटी, 03 अक्टूबर (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के उपनेता एवं सांसद गौरव गोगोई ने नगांव जिले की दो महिलाओं को कथित रूप से कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन कर भारत-बांग्लादेश सीमा के पार भेजे जाने और उनके लापता होने के मामले में विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को आपात पत्र लिखा है। उन्होंने दोनों महिलाओं को तलाशकर भारत वापस लाने के लिए विदेश मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

गोगोई के अनुसार, नगांव के बगरिगुड़ी की जहांनारा बेगम और धिंग गांव की मुमताज बेगम को 13 और 14 जून की मध्यरात्रि सीमा के पार बांग्लादेश भेज दिया गया था। इसके बाद से दोनों महिलाओं का कोई पता नहीं चल पाया है।

गोगोई ने कहा कि इस मामले में गौहाटी उच्च न्यायालय ने विदेश मंत्रालय को भी पार्टी बनाया है। उन्होंने विदेश मंत्री से व्यक्तिगत रूप से मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।

पत्र में मामले की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए गोगोई ने कहा कि नगांव स्थित विदेशी न्यायाधिकरण ने वर्ष 2019 में दोनों महिलाओं को विदेशी घोषित किया था। इसके खिलाफ दोनों ने गौहाटी उच्च न्यायालय का रुख किया था। इस वर्ष अप्रैल में उच्च न्यायालय ने आवश्यक साक्ष्यों का उचित परीक्षण नहीं किए जाने का हवाला देते हुए पूर्व आदेश को रद्द कर दिया और मामले को पुनर्विचार के लिए न्यायाधिकरण को भेज दिया।

अदालत के निर्देश के अनुसार जहानारा बेगम 29 मई और मुमताज बेगम 30 मई को न्यायाधिकरण के समक्ष पेश हुई थीं। इसके तुरंत बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया। गोगोई ने कहा कि इसके कारण दोनों महिलाओं को न्यायाधिकरण के नए फैसले के बाद दोबारा उच्च न्यायालय जाने के कानूनी अवसर से वंचित होना पड़ा।

गोगोई ने 3 सितंबर को गौहाटी उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, अदालत ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा था कि न्यायाधिकरण के कार्यालय ने प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने में जानबूझकर देरी की थी।

उन्होंने कहा कि नगांव के जिला आयुक्त ने 2 जून को दोनों महिलाओं को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया था। उस समय उनके पुलिस हिरासत में होने के कारण इस आदेश का पालन करना संभव नहीं था। गोगोई के अनुसार, उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को कथित 'हास्यास्पद' बताया था।

इसके बावजूद 13-14 जून की रात सीमा सुरक्षा बल की मदद से दोनों महिलाओं को सीमा स्तंभ 1339/एमपी के निकट गेट नंबर दो के रास्ते बांग्लादेश भेज दिया गया।

गोगोई ने विदेश मंत्रालय से बांग्लादेश सरकार के साथ तत्काल संपर्क कर दोनों महिलाओं को तलाशने और वापस लाने, ढाका तथा सिलहट स्थित भारतीय मिशनों को मामले में सक्रिय कार्रवाई करने, भारत वापसी के लिए आवश्यक कांसुलर सहायता और यात्रा दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा दोनों परिवारों को तलाश अभियान की प्रगति के बारे में नियमित रूप से सूचित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि नगांव के दोनों परिवार पिछले कई महीनों से अपनी बेटियों, माताओं और पत्नियों की तलाश में परेशान हैं। गोगोई ने कहा कि सरकारी हिरासत में रही किसी व्यक्ति को सीमा पार भेजे जाने के बाद उसका इस तरह लापता हो जाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश