ब्रह्मपुत्र नद पर द्वितीय सरायघाट रेल सह सड़क पुल मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी में लाएगा बदलाव
-आगियाठरी-कामाख्या सेक्शन के दोहरीकरण से पूर्वोत्तर क्षेत्र की कनेक्टिविटी होगी मजबूत
गुवाहाटी, 23 सितंबर (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) द्वितीय सरायघाट रेल सह सड़क पुल परियोजना पर कार्य कर रहा है, जिसमें आगियाठरी और कामाख्या स्टेशनों के बीच रेल पटरी का दोहरीकरण करना भी शामिल है। यह असम के परिवहन अवसंरचना में एक अहम बढ़ावा मिलेगा। यह परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी पर रेल और सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, गुवाहाटी के लिए परिवहन क्षमता बढ़ाएगा और पूर्वोत्तर क्षेत्र की व्यापक कनेक्टिविटी जरूरतों को पूरा करने में काफी सहयोगी होगा। मौजूदा सरायघाट पुल सितंबर, 1962 में बनकर तैयार हुआ था और 23 सितंबर, 1962 को पहला इंजन इस पुल से गुजरा था। छह दशकों से भी ज़्यादा समय से, यह ब्रह्मपुत्र के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के बीच एक अहम कड़ी और पूर्वोत्तर के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य कर रहा है। इस क्षेत्र में यात्रियों और माल परिवहन बढ़ने के साथ, इस अहम कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाना काफी आवश्यक हो गया है।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज बताया है कि आगियाठरी और कामाख्या स्टेशनों के बीच 7.20 किलोमीटर के दोहरीकरण लाइन परियोजना को 2024 में रेल मंत्रालय ने मंज़ूरी दी थी। इसके बाद विस्तृत योजना और निविदा का कार्य शुरू हुआ। बड़े अवसंरचना परियोजनाओं में व्यापक अनुभव रखने वाली भारत की प्रमुख इंजीनियरिंग और निर्माण कंपनियों में से एक, लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) को इस परियोजना के निष्पादन करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। नए पुल के अत्यधिक विकसित शहरी इलाके में होने के कारण, इस परियोजना में ज़मीन अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाने और मौजूदा यूटिलिटीज़ को हटाने से जुड़ी कई चुनौतियां सामने आयीं। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन के सक्रिय सहयोग से इनमें से ज़्यादातर समस्याओं का समाधान किया जा चुका है। पूसीरे शेष मामलों को सुलझाने और कार्य के लिए ज़रूरी जगह उपलब्ध कराने के लिए संबंधित राज्य एजेंसियों के साथ निरंतर तालमेल बना रहा है। इस बीच, इंजीनियरिंग के मोर्चे पर परियोजना ने काफी प्रगति की है; जियोटेक्निकल जांच का काम पूरा हो चुका है और साथ ही प्रमुख इंजीनियरिंग, डिज़ाइन और कंस्ट्रक्शन ड्राइंग से जुड़े मुख्य कार्य भी पूरे कर लिए गए हैं।
इस परियोजना का एक अहम हिस्सा ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रस्तावित 1.3 किलोमीटर लंबा डबल-डेकर रेल-कम-रोड ब्रिज है। निचले डेक पर दो रेल लाइनें होंगी, जबकि ऊपरी डेक पर तीन-लेन वाली सड़क और एक फुटपाथ होगा। इसकी तुलना में, मौजूदा सरायघाट ब्रिज पर एक रेल लाइन और दो-लेन वाली सड़क है। मुख्य ब्रिज 'वेल फाउंडेशन' पर बनाया जाएगा, जिसमें वेल्डेड ओपन वेब गर्डर (ओडब्ल्यूजी) सुपरस्ट्रक्चर होगा और इसका स्पैन 125 मीटर लंबा होगा। मुख्य ब्रिज दोनों तरफ एप्रोच वायाडक्ट्स से जुड़ा होगा, जिसमें आगियाठरी की तरफ लगभग 600 मीटर और कामाख्या की तरफ 200 मीटर होगा। वायाडक्ट्स 'पाइल फाउंडेशन' पर टिके होंगे और इनमें रेल एवं सड़क दोनों हिस्सों के लिए कम्पोजिट गर्डर सुपरस्ट्रक्चर होंगे। प्रत्येक साइड पर चार सड़क स्पैन होंगे, जो इंटीग्रेटेड डबल-डेकर व्यवस्था का हिस्सा होंगे। यह परियोजना एनएचएआई द्वारा बनाए जा रहे सड़क एप्रोच से भी जुड़ेगा, जिससे एक तरफ जालुकबारी और दूसरी तरफ आगियाठरी साइड रोड नेटवर्क तक कनेक्टिविटी मिलेगी।
इस परियोजना के योजना और कार्य आधुनिक निर्माण तकनीक, डिजिटल इंजीनियरिंग, गुणवत्ता और संरक्षा पर विशेष जोर देते हुए किया जा रहा है। स्ट्रक्चर और उसके परफॉर्मेंस की बेहतर निगरानी के लिए अत्याधुनिक डिजिटल मॉनिटरिंग और ब्रिज इंस्ट्रूमेंटेशन सिस्टम लगाए जाएंगे। निर्माण का तरीका ब्रह्मपुत्र नदी की मुश्किल स्थितियों को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है, जिसमें फाउंडेशन बनाने, स्ट्रक्चर तैयार करने, क्वालिटी एश्योरेंस, निर्माण सुरक्षा और लंबे समय तक चलने की क्षमता पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
द्वितीय सरायघाट रेल-कम-रोड ब्रिज न सिर्फ़ आगियाठरी-कामाख्या रेलवे सेक्शन को दोहरीकरण करने के लिए ज़रूरी है, बल्कि यह गुवाहाटी और पूर्वोत्तर के विस्तृत परिवहन तंत्र को सहयोग करने वाला एक इंटीग्रेटेड रेल और रोड अवसंरचनात्मक परियोजना भी है। रेलवे की अतिरिक्त क्षमता से यात्रियों और माल की आवाजाही सुलभ होगी, जबकि तीन-लेन वाली सड़क शहर के उत्तरी और दक्षिणी किनारों के बीच कनेक्टिविटी को मज़बूती प्रदान करेगा और भविष्य की परिवहन ज़रूरतों को पूरा करेगा। रेल, सड़क और उससे जुड़े अप्रोच इंफ्रास्ट्रक्चर को एक ही एकीकृत कॉरिडोर के तौर पर लाकर, यह परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी पर मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा। इस परियोजना की रेलवे बोर्ड सहित संबंधित अधिकारियों द्वारा पूर्ण सहयोग और निगरानी की जा रही है, जो पूर्वोत्तर क्षेत्र में कनेक्टिविटी और क्षमता बढ़ाने के लिए इसके महत्व को दर्शाता है। एनएचएआई की रोड एप्रोच के साथ इसके जुड़ने से कॉरिडोर की मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और अधिक मजबूत होगी।
तैयारी का कार्य काफी हद तक पूरा हो चुका है और अब परियोजना निष्पादन चरण में प्रवेश कर रहा है। मॉनसून का मौसम समाप्त होने के साथ, एल एंड टी मोबिलाइज़ेशन और तैयारी की गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है और पाइलिंग का कार्य अक्टूबर 2026 से शुरू करने का लक्ष्य है। चालू वित्त वर्ष के दौरान निर्माण के अन्य प्रमुख कार्यों में धीरे-धीरे तेज़ी आने की उम्मीद है, जिसमें नींव, स्ट्रक्चर, वायाडक्ट, अर्थवर्क और अन्य संबंधित कार्यों पर कार्य तेज़ी से आगे बढ़ेगा।
यह परियोजना अगले कुछ वर्षों में पूरा हो जाएगा और परियोजना टीम गुणवत्ता, संरक्षा, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता, टिकाऊपन और तकनीकी विकास के उच्च मानकों को बनाए रखते हुए समय पर कार्य पूरा करने की पूरजोर कोशिश कर रही है। परियोजना पूर्ण होने पर, द्वितीय सरायघाट रेल सह सड़क पुल ब्रह्मपुत्र नदी पर रेल और सड़क क्षमता को बढ़ाएगा, गुवाहाटी के दोनों किनारों के बीच कनेक्टिविटी को मज़बूत करेगा और यात्रियों व सामान की आवाजाही को सुलभ बनाएगा, जिससे असम एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र का परिवहन तंत्र और अधिक मज़बूत होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

