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जीएसटी विभाग तलाशी के दौरान जबरन टैक्स वसूल नहीं सकता: गौहाटी हाईकोर्ट

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जीएसटी विभाग तलाशी के दौरान जबरन टैक्स वसूल नहीं सकता: गौहाटी हाईकोर्ट


गुवाहाटी, 18 सितंबर (हि.स.)। गौहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण आदेश में जीएसटी विभाग को तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान व्यापारियों से जबरन टैक्स वसूलने से रोक दिया। अदालत ने संबंधित कारोबारी प्रतिष्ठान को अपनी व्यावसायिक गतिविधियां जारी रखने की भी अनुमति देने का निर्देश दिया।

यह मामला तिनसुकिया स्थित दीपक कंस्ट्रक्शन में 15 सितंबर से चल रही असम जीएसटी की तलाशी और जब्ती की कार्रवाई से जुड़ा है। कार्रवाई के दौरान विभाग ने प्रतिष्ठान पर करीब दो करोड़ रुपये की कर देनदारी का दावा किया था। साथ ही, प्रतिष्ठान को कारोबार जारी रखने से भी रोक दिया गया था।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित गोयल ने अदालत के समक्ष दलील दी कि जीएसटी विभाग तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाई के दौरान व्यापारियों से कथित रूप से जबरन जीएसटी की वसूली कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिष्ठान को कारोबार करने से रोकना जीएसटी कानून के प्रावधानों और संवैधानिक स्वतंत्रताओं के विपरीत है।

वहीं, जीएसटी विभाग की ओर से अदालत में कहा गया कि याचिकाकर्ता पर कई करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है, जिसका भुगतान नहीं किया गया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जीएसटी विभाग को नोटिस जारी किया और चल रही तलाशी के दौरान याचिकाकर्ता से जबरन टैक्स वसूलने पर रोक लगा दी। अदालत ने याचिकाकर्ता को अपना कारोबार जारी रखने की भी अनुमति दी।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरुणाभ चौधरी, प्रणय जालान और प्रांजल सरावगी भी अदालत में पेश हुए। असम जीएसटी की ओर से अधिवक्ता विक्रम चौधरी और जीएसटी सेंट्रल की ओर से सुमन चेतिया ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश