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बरपेटा में एक साथ जलीं परिवार की चार चिताएं, ‘पापा-पापा, मम्मा-मम्मा’ की पुकार से दहला हर दिल

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बरपेटा में एक साथ जलीं परिवार की चार चिताएं, ‘पापा-पापा, मम्मा-मम्मा’ की पुकार से दहला हर दिल


बरपेटा (असम), 28 अक्टूबर (हि.स.)। ‘पापा-पापा… मम्मा-मम्मा…’ दो मासूम बच्चों की यह पुकार और चार चिताओं की लपटें। असम के बरपेटा में मंगलवार की देर रात को ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। गुवाहाटी के बोरा सर्विस स्थित होटल बिलास इन में हुई गोलीबारी में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत के बाद जब उनके शव घर पहुंचे, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया। परिजनों की चीख-पुकार और बच्चों की करुण पुकार के बीच हर आंख नम थी।

इस दर्दनाक घटना में जान गंवाने वालों में होटल की स्वामिनी हेलेना भराली, उनके बड़े भाई भूदेव भराली, बेटे देवर्षि कश्यप और बहू रिनिका कश्यप शामिल थे। गुवाहाटी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (जीएमसीएच) से चारों के शव बरपेटा स्थित उनके आवास पर लाए गए। इसके बाद बरपेटा के मुक्तिधाम श्मशान घाट पर एक साथ चार चिताएं जलाई गईं। एक ही परिवार के चार सदस्यों की एक साथ अंतिम विदाई ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया।

इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू देवर्षि और रिनिका के दो मासूम बच्चों का अनाथ हो जाना है। करीब सात से आठ वर्ष की बेटी और महज डेढ़ वर्ष के बेटे के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। अपने माता-पिता के निर्जीव शरीर के पास बच्चों की ‘पापा-पापा, मम्मा-मम्मा’ की पुकार ने वहां मौजूद लोगों को भीतर तक झकझोर दिया। उन्हें शायद अभी यह समझ भी नहीं है कि उनके जीवन में आई इस कमी को अब कोई पूरा नहीं कर सकेगा।

परिवार के घर में सैकड़ों लोग जमा हुए। रिश्तेदारों का विलाप, परिजनों की सिसकियां और शोक में डूबे लोगों की भीड़ के बीच हर तरफ मातम पसरा था। जिस घर में कभी खुशियां गूंजती थीं, वहां अब अपनों को खोने का असहनीय दर्द था।

गुवाहाटी के होटल बिलास इन में 26 अक्टूबर की रात हुई गोलीबारी के पीछे होटल के पट्टे और प्रबंधन को लेकर विवाद की बात सामने आई है। इस मामले में घनकांत गोगोई पर गोलीबारी करने का आरोप है। घटना में नारायण दास नामक एक अन्य रिश्तेदार की भी मौत हुई है। इस प्रकार गोलीबारी में कुल पांच लोगों की जान जाने की सूचना है।

इस घटना ने बरपेटा में गहरा शोक और आक्रोश पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों और जागरूक नागरिकों ने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।

चार चिताओं की लपटों के साथ एक परिवार की खुशियां भी राख हो गईं। पीछे रह गए दो मासूम बच्चे, जिनके लिए अब मां की ममता और पिता का दुलार केवल यादों में सिमटकर रह जाएगा। बरपेटा की यह घटना लंबे समय तक लोगों के दिलों में एक गहरे जख्म की तरह बनी रहेगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश