धुबड़ी के आलमगंज में 650 बीघा सरकारी भूमि अतिक्रमण मुक्त, 500 से अधिक परिवार प्रभावित
-मजार और कब्रिस्तान को हटाने की कार्रवाई फिलहाल स्थगित, औद्योगिक पार्क निर्माण की है सरकार की योजना
धुबड़ी (असम), 01 नवम्बर (हि.स.)। असम के धुबड़ी जिले के गौरीपुर राजस्व चक्र अंतर्गत आलमगंज के नौवें खंड में रविवार सुबह छह बजे से जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान प्रशासन ने लगभग 650 बीघा सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। जिला आयुक्त दिवाकर नाथ ने बताया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, इस अभियान में पांच सौ से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं। वहीं, कुल मिलाकर लगभग 800 परिवारों के अतिक्रमण से संबंधित आंकड़े सामने आए हैं। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर औद्योगिक पार्क स्थापित करने की योजना है। इसके लिए लगभग तीन हजार बीघा जमीन की आवश्यकता होगी। सरकार धुबड़ी जिले को पूर्वोत्तर के प्रवेश द्वार के रूप में विकसित करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण योजना तैयार कर रही है।
अभियान के दौरान इलाके में स्थित ऐतिहासिक कामेल पीर साहब उद्दीन औलिया की मजार और कब्रिस्तान को हटाने की कार्रवाई को लेकर भी तनाव की स्थिति बनी। स्थानीय लोगों के अनुसार, मजार कई सौ वर्ष पुरानी है और इससे क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था एवं भावनाएं जुड़ी हुई हैं। मजार को हटाने के लिए पहुंची एक जेसीबी मशीन के चालक की तबीयत अचानक बिगड़ने की बात भी स्थानीय लोगों ने कही। इसके बाद मजार और कब्रिस्तान को हटाने की कार्रवाई अस्थायी रूप से रोक दी गई।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मजार को नहीं हटाने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा से भी हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अतिक्रमण के तहत बने घरों को हटाने की कार्रवाई से उन्हें आपत्ति नहीं है, लेकिन मजार उनकी आस्था और भावनाओं से जुड़ी है, इसलिए इसे संरक्षित रखा जाना चाहिए।
इस संबंध में जिला आयुक्त दिवाकर नाथ ने बताया कि स्थानीय लोगों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए मजार और कब्रिस्तान के प्रबंधन समितियों के साथ बातचीत की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, अभियान से प्रभावित भूमिहीन परिवारों के लिए जिला प्रशासन ने अस्थायी पुनर्वास की व्यवस्था करने की पहल की है। इसके तहत चिराखोवा और बयेजेर अलगा क्षेत्रों में अस्थायी रूप से बसने के लिए जमीन चिह्नित की गई है।
फिलहाल आलमगंज में अतिक्रमण हटाओ अभियान पूरा हो चुका है और बुलडोजर वापस लौट गए हैं। अब मजार एवं कब्रिस्तान के भविष्य को लेकर प्रशासन और संबंधित समितियों के बीच होने वाली बातचीत पर स्थानीय लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

