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पांडु कामाख्या कॉलोनी की 64वीं दुर्गा पूजा की थीम काल्पनिक दुनिया

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गुवाहाटी, 13 अक्टूबर (हि.स.)। दुर्गा पूजा की तैयारियों के साथ ही असम की राजधानी के मालीगांव-पांडू क्षेत्र के विभिन्न कोने पहले से ही उत्सव के माहौल में रंगने लगे हैं। दर्शकों के आकर्षण का एक मुख्य केंद्र पांडू कामाख्या कॉलोनी दुर्गा पूजा समिति भी अपने 64वें वर्ष को यादगार बनाने के लिए एक विशेष थीम की योजना बना रही है।

इस वर्ष की पूजा की थीम 'सपनों से बुनी एक काल्पनिक दुनिया' है। आयोजकों को उम्मीद है कि सपने, कल्पना और कला का यह अनूठा संगम दर्शकों का ध्यान आकर्षित करेगा।

इस थीम की सोच को वास्तविक रूप देने के लिए पंडाल को हाथ से करघे से बने सामान (हैंडलूम), रंगीन फीतों, धागों, विभिन्न कलाकृतियों और पारंपरिक शिल्पकला के माध्यम से सजाया जाएगा।

पंडाल के डिजाइन और सजावट में रचनात्मकता की एक विशेष छाप देखने को मिलेगी। थीम के अनुसार ही प्रतिमा को भी एक विशेष ढांचे के भीतर स्थापित किया जाएगा।

लगभग 12 फीट से अधिक ऊंची इस प्रतिमा को थीम-आधारित ढांचे के ठीक बीच में स्थापित किया जाएगा।

इस वर्ष की पूजा के लिए समिति की ओर से लगभग 25 लाख रुपये का बजट तय किया गया है।

प्रतिमा निर्माण की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के मूर्तिकार श्यामल पाल को सौंपी गई है। वहीं, पंडाल निर्माण और पूरी थीम को साकार करने की जिम्मेदारी पश्चिम बंगाल के डेकोरेटर प्रबीर दत्त और उनके सहयोगियों ने ली है।

आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार प्रतिमा, पंडाल और प्रकाश सज्जा के मेल से इस वर्ष की पूजा में एक बहुत ही आकर्षक दृश्य देखने को मिलेगा।

पूजा के विभिन्न आयोजनों में स्थानीय लोगों की भी सक्रिय भागीदारी रहेगी। विशेष रूप से 'विधान संघ महिला गोष्ठी' पूजा के विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

समिति के अध्यक्ष अजय कुमार पाल, विश्वजीत रॉय और अंशुमान दे हैं। साधारण सचिव जुगल बनिक और मलय साहा हैं। कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी रूपक दे और जयंत पाल संभाल रहे हैं। समिति की ओर से बताया गया है कि पूजा के सभी आयोजनों को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए तैयारियां पहले ही शुरू कर दी गई हैं। पूजा की शुरुआत से ही परंपरा और उत्सव का अनूठा मेल देखने को मिलेगा।

आगामी 15 अक्टूबर की शाम 7 बजे दुर्गा प्रतिमा और पंडाल का औपचारिक उद्घाटन किया जाएगा। उद्घाटन के अवसर पर बड़ी संख्या में आगंतुकों की उपस्थिति से पूजा परिसर का उत्सव का माहौल और अधिक बढ़ जाने की उम्मीद है। आगंतुकों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

समिति की ओर से बताया गया है कि सरकार द्वारा निर्धारित नियमों और नीतियों का पालन करते हुए पूजा पंडाल में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी।

हर बार की तरह इस बार भी पूजा का एक प्रमुख आकर्षण स्मारिका 'प्रणाम' होगी। पूजा मंच पर इस शारदीय स्मारिका का औपचारिक विमोचन किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर