राजीव गांधी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मानवाधिकार संवाद कार्यक्रम आयोजित
इटानगर, 22 अक्टूबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के पापुम पारे जिला में स्थित राजीव गांधी विश्वविद्यालय ने आज अपने कॉन्फ्रेंस हॉल में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के विशेष मॉनिटर, प्रो. कन्हैया त्रिपाठी के साथ एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में छात्रों, शोधार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने मानवाधिकारों, लैंगिक समानता और छात्र कल्याण जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा की।
उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए, प्रो. त्रिपाठी ने एक समावेशी और सहयोगी समाज के निर्माण में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता, समानता और सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने मानवीय गरिमा, संवैधानिक मूल्यों और प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने लैंगिक समानता के महत्व पर भी जोर दिया और भेदभाव-मुक्त वातावरण बनाने की आवश्यकता बताई, जहां हर व्यक्ति समान रूप से भाग ले सके और आगे बढ़ सके।
संवाद के दौरान, प्रो. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसे कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जो पूरे परिसर में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता, समानता, गरिमा और आपसी सम्मान को बढ़ावा दें। उन्होंने मानवाधिकारों से जुड़ी जानकारी फैलाने, सकारात्मक पहलों को उजागर करने और विभिन्न विचारों को मंच प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय का न्यूज़लेटर प्रकाशित करने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर एक 'मानवाधिकार सेल' और प्रत्येक छात्रावास में एक 'मानवाधिकार क्लब' स्थापित करने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य छात्रों की भागीदारी बढ़ाना, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना, तथा विश्वविद्यालय समुदाय को मानवाधिकारों की रक्षा करने और एक सुरक्षित, समावेशी एवं सौहार्दपूर्ण परिसर बनाने में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।
प्रो. त्रिपाठी ने मानवाधिकारों पर जर्नल और संपादित पुस्तकें प्रकाशित करने का भी सुझाव दिया। साथ ही, उन्होंने विश्वविद्यालय में मानवाधिकारों के लिए एक समर्पित केंद्र स्थापित करने की वकालत की, ताकि शोध, शैक्षणिक गतिविधियों, जागरूकता और मानवाधिकारों के समर्थन (एडवोकेसी) को बढ़ावा दिया जा सके।
उन्होंने मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए संस्थागत तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि सामूहिक प्रयासों और उचित उपायों के माध्यम से हर व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने विश्वविद्यालय और छात्रावासों में पानी की उचित व्यवस्था, स्वच्छता और साफ-सफाई बनाए रखने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। इसके अलावा, उन्होंने डिजिटल वातावरण में छात्रों और विश्वविद्यालय समुदाय के अन्य सदस्यों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए 'साइबर हाइजीन' (डिजिटल स्वच्छता) और साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस संवाद सत्र ने छात्रों और फैकल्टी सदस्यों को मानवाधिकारों, समानता और संस्थागत जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दों पर विशेष मॉनिटर के साथ सीधे बातचीत करने का अवसर प्रदान किया। बातचीत के दौरान, कुछ फैकल्टी सदस्यों और छात्रों ने भी अपनी शिकायतें और चिंताएं रखीं, जिन्हें संबंधित अधिकारियों द्वारा उचित विचार और आवश्यक कार्रवाई के लिए नोट किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

