राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार में विशेष योगदान के लिए दीपक बिस्वास को मिला 'हिंदी राष्ट्रीय पुरस्कार'
गुवाहाटी, 15 अगस्त (हि.स.)। राजभाषा हिंदी के प्रभावी प्रयोग, सक्रिय प्रचार-प्रसार और कार्यालयीन कार्यों को मुख्य रूप से हिंदी में निष्पादित करने में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा 'हिंदी राष्ट्रीय पुरस्कार' प्रदान किया गया है। यह सम्मान पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) निर्माण संगठन, मालीगांव के पूर्व उप-वित्तीय सलाहकार बरिष्ठ एवं मुख्य लेखा अधिकारी तथा एमडी जेडटीआई/अलीपुरद्वार के वरिष्ठ अतिथि व्याख्याता दीपक बिस्वास को मिला है। इस पुरस्कार के साथ उन्हें 3,000 की नकद राशि भी प्रदान की गई।
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पूसीरे निर्माण संगठन में आयोजित एक समारोह के दौरान महाप्रबंधक(निर्माण) (मालीगांव), आशीष बंसल ने दीपक बिस्वास को यह सम्मान सौंपा। इस अवसर पर मुख्य प्रशासनिक अधिकारी(निर्माण) अंजनी कुमार, हितेंद्र गोयल और सुरेश कुमार सापड़ा सहित कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे।
समारोह में राजभाषा हिंदी के प्रति दीपक बिस्वास की प्रतिबद्धता, दक्षता, निष्ठा और सक्रिय सहयोग की सराहना की गई। इस राष्ट्रीय पुरस्कार को भारतीय रेल में राजभाषा के प्रचार और प्रभावी कार्यान्वयन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि दीपक बिस्वास, प्रख्यात पूर्व राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन नेता स्वर्गीय ज्योतिर्मय बिस्वास के ज्येष्ठ पुत्र हैं। उनकी इस सफलता पर सहकर्मियों और शुभचिंतकों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दीं। महाप्रबंधक आशीष बंसल ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता भविष्य में अन्य सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को दैनंदिन कार्यों में हिंदी का उपयोग बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगी।
अंत में, दीपक बिस्वास ने अपनी इस व्यक्तिगत सफलता का श्रेय देते हुए भारतीय रेलवे (दिल्ली), अपने पूर्व कार्यस्थल पूर्वोत्तर सीमा रेलवे निर्माण संगठन (मालीगांव), रेल मंत्रालय (भारत सरकार) और सभी कार्मिक संगठनों का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर

