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लिसु जनजाति को पाठ्यपुस्तक में शामिल करने पर फोरम ने शिक्षा विभाग से मांगा स्पष्टीकरण

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इटानगर, 14 जुलाई (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजाति प्रोटेक्शन फोरम ने मंगलवार को शिक्षा विभाग से चांगलांग ज़िले की योबिन (लिसु) जनजाति को कक्षा 8वीं की पाठ्य-पुस्तक में शामिल करने के बारे में स्पष्टीकरण की मांगा की है। फोरम का आरोप है कि यह एक गंभीर गलती है।

अरुणाचल प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, फोरम के प्रवक्ता मोगु लक्ष्मी ने विषय को पाठ्य-पुस्तक में शामिल शामिल किए जाने को शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की बड़ी गलती बताया।

लक्ष्मी ने ज़ोर देकर कहा, कोई भी संविधान और कानून से ऊपर नहीं है, लेकिन शिक्षा विभाग ने गलती कर दी है। उन्होंने मांग की कि राज्य में इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।

फोरम का आरोप है कि कक्षा 8वीं की पाठ्य-पुस्तक अरूणाल प्रदेश का इतिहास और संस्कृति भाग के एक अध्याय में लिसु समुदाय को राज्य का एक आदिवासी समुदाय बताया गया है जो कि यह असंवैधानिक और लोगों को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने मांग की कि जब तक इस मामले की समीक्षा न हो जाए, तब तक इस पाठ्यपुस्तक को तुरंत वापस लिया जाए और उस पर रोक लगाई जाए।

फोरम ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से तुरंत कार्रवाई करने का आग्रह किया। उनका कहना है कि इस तरह की सामग्री से राज्य की अनुसूचित जनजाति की स्थिति और संवैधानिक प्रावधानों को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी