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'भारत छोड़ो आंदोलन' की 84वीं वर्षगांठ पर राजीव भवन में विशेष कार्यक्रम

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'भारत छोड़ो आंदोलन' की 84वीं वर्षगांठ पर राजीव भवन में विशेष कार्यक्रम


-रिपुन बोरा ने नई पीढ़ी से देश सेवा का आह्वान किया

गुवाहाटी, 09 अगस्त (हि.स.)। ऐतिहासिक 'भारत छोड़ो आंदोलन' की 84वीं वर्षगांठ के मौके पर आज असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) मुख्यालय राजीव भवन में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रदेश कांग्रेस के प्रशासनिक महासचिव बिपुल गोगोई द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।

मुख्य वक्ता के तौर पर कार्यक्रम में शामिल पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रिपुन बोरा ने 'भारत छोड़ो आंदोलन' के ऐतिहासिक महत्व और उसकी अहमियत पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, भारत छोड़ो आंदोलन भारत की आजादी की लड़ाई का सबसे शक्तिशाली और निर्णायक आंदोलन था। 08 अगस्त 1942 की रात को इस प्रस्ताव को अपनाए जाने के बाद, ब्रिटिश प्रशासन ने महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू समेत कांग्रेस के लगभग 10,000 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि, अंग्रेजों की दमनकारी धमकियों से डरे बिना, देश भर के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरे जोश के साथ 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू किया और आखिरकार अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया।

अपने संबोधन में बोरा ने युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे इस ऐतिहासिक आंदोलन के बलिदान और देशभक्ति से प्रेरणा लें और खुद को देश की सेवा में समर्पित करें।

पूर्व राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा के साथ-साथ, आज के इस कार्यक्रम में पूर्व विधायक बिनंदा सैकिया, एपीसीसी के संगठनात्मक महासचिव रमन्ना बरुवा, महासचिव अरुण तिवारी, गुवाहाटी शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष स्वपन दास और बड़ी संख्या में पार्टी नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय