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डीएसपी खर्गेश्वर राभा की रहस्यमय मौत की न्यायिक जांच की मांग, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों से की मुलाकात

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डीएसपी खर्गेश्वर राभा की रहस्यमय मौत की न्यायिक जांच की मांग, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने परिजनों से की मुलाकात


गुवाहाटी, 05 नवंबर (हि.स.)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को बोको स्थित दिवंगत पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) खर्गेश्वर राभा के आवास पर पहुंचकर उनके परिजनों से मुलाकात की। बंगाईगांव के एक होटल के कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई उनकी मौत के मामले में कांग्रेस ने उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल में एपीसीसी के महासचिव रमन्ना बरुवा, वरिष्ठ नेता प्रणय राभा, रमेन सिंह राभा, जादव स्वर्गियारी, कामरूप जिला कांग्रेस अध्यक्ष प्रांजित चौधरी, सेवा दल के अध्यक्ष दीप बायन, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष निवारण चौधरी तथा पार्टी नेता राजीव राभा और प्रशांत बोरो शामिल थे। नेताओं ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और न्याय की लड़ाई में हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।

परिजनों से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि डीएसपी की मौत से जुड़े कई सवाल अब तक अनुत्तरित हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शुरुआत से ही इस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। खर्गेश्वर राभा मुख्यमंत्री के विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ में तैनात थे। उनका शव बंगाईगांव स्थित होटल जाह्नवी रीजेंसी के कमरा नंबर 102 में मिला था।

कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि होटल का कमरा कथित तौर पर डीएसपी के नाम पर बुक नहीं किया गया था, बल्कि किशोर हालोई नामक व्यक्ति के पहचान पत्र के आधार पर पंजीकरण किया गया था। उन्होंने किशोर हालोई की पहचान, अधिकारी के साथ उसके संबंध और उसके दस्तावेजों पर कमरा बुक किए जाने के पीछे की परिस्थितियों का खुलासा करने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि जब डीएसपी की पत्नी ने होटल के रिसेप्शन पर फोन कर उनके ठहरने के बारे में जानकारी मांगी, तो कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि खर्गेश्वर राभा नाम का कोई व्यक्ति होटल में नहीं ठहरा है। नेताओं के अनुसार, उनकी पत्नी सुबह करीब 8.30 बजे स्वयं होटल पहुंचीं, तब भी कर्मचारियों ने उनके वहां ठहरने की बात से इनकार किया।

कांग्रेस नेताओं ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि 20 से 22 अक्टूबर के बीच लगातार तीन दिनों तक कमरे से न तो भोजन और न ही पानी या रूम सर्विस का कोई ऑर्डर दिया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि होटल प्रबंधन ने इतने दिनों तक कमरे में किसी गतिविधि के नहीं होने के बावजूद इसकी जांच क्यों नहीं की और पुलिस को इसकी सूचना क्यों नहीं दी।

प्रतिनिधिमंडल ने कमरे का दरवाजा खोले जाने की परिस्थितियों पर भी गंभीर सवाल उठाए। नेताओं ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि दरवाजा तोड़ने से पहले प्लास्टिक शीट और चटाइयों की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि बंद कमरे में शव होने और उसके सड़ने की जानकारी दरवाजा खोले जाने से पहले होटल कर्मचारियों को कैसे हो गई थी।

कांग्रेस नेताओं ने होटल जैसे बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान में मास्टर या डुप्लीकेट चाबी उपलब्ध नहीं होने के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि दरवाजा तोड़ने की प्रक्रिया से महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्यों को नुकसान पहुंचा हो सकता है।

गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री के अपने विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ में तैनात डीएसपी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस ने मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच गौहाटी उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की। इसके अलावा किशोर हालोई और होटल जाह्नवी रीजेंसी के प्रबंधन से हिरासत में पूछताछ करने तथा होटल के सभी सीसीटीवी फुटेज और संबंधित फोन कॉल रिकॉर्ड को तत्काल जब्त कर फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने चेतावनी दी कि जब तक डीएसपी की मौत के पीछे की सच्चाई सामने नहीं आती और उनके परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश