बीटीसी सचिवालय घटना की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन
कोकराझार (असम), 06 मार्च (हि.स.)। बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) सचिवालय, कोकराझार में 29 नवंबर 2025 को हुई घटना के संबंध में तथ्य एवं परिस्थितियों की जांच के लिए असम सरकार द्वारा एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया है। यह आयोग गौहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एचएन शर्मा की अध्यक्षता में गठित किया गया है। आयोग का गठन कमीशंस ऑफ इंक्वायरी एक्ट, 1952 की धारा 3 के तहत किया गया है।
जांच आयोग उक्त घटना से जुड़ी सभी परिस्थितियों की पड़ताल करेगा। आयोग विशेष रूप से बोडोलैंड विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन, बीटीसी सचिवालय की ओर निकाले गए मार्च, बैरिकेड तोड़ने, जबरन प्रवेश और कथित तोड़फोड़ की घटनाओं की जांच करेगा। इसके साथ ही जिला प्रशासन, पुलिस तथा बीटीसी सचिवालय के अधिकारियों द्वारा स्थिति को संभालने के लिए उठाए गए कदमों की पर्याप्तता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
आयोग यह भी जांच करेगा कि क्या संबंधित अधिकारियों की ओर से स्थिति का पूर्वानुमान लगाने या उसे नियंत्रित करने में कोई चूक या विफलता हुई थी। इसके अतिरिक्त सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान तथा सरकारी कार्यों में आई बाधा की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
इस संबंध में आयोग ने असम सरकार, बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल, बोडोलैंड विश्वविद्यालय, प्रभावित व्यक्तियों, विभिन्न संगठनों तथा आम जनता से लिखित बयान या अभ्यावेदन आमंत्रित किए हैं, जो इस मामले से संबंधित तथ्यों से अवगत हैं।
प्रस्तुत किए जाने वाले लिखित बयान या अभ्यावेदन व्यक्तिगत अथवा सामूहिक रूप से दिए जा सकते हैं। इसमें अभ्यावेदनकर्ता का पूरा नाम, डाक पता, संपर्क नंबर, संबंधित दस्तावेज तथा यदि कोई गवाह हों तो उनकी सूची भी संलग्न करनी होगी। साथ ही प्रस्तुत तथ्यों के समर्थन में शपथपत्र (एफिडेविट) भी देना अनिवार्य होगा।
आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी लिखित बयान तीन प्रतियों में आयोग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से कार्यालय समय के दौरान या पंजीकृत डाक/स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे जाएं, ताकि वे 26 मार्च, 2026 तक आयोग के कार्यालय में प्राप्त हो जाएं।
इसके अतिरिक्त इच्छुक व्यक्ति अपने अभ्यावेदन जिला आयुक्त, कोकराझार के कार्यालय के माध्यम से भी भेज सकते हैं। इस प्रक्रिया के तहत सहायक आयुक्त सुभम सिन्हा के माध्यम से प्राप्त अभ्यावेदनों को आयोग को अग्रेषित किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

