वास्तविक समस्याओं को नवाचार के अवसरों में बदलने के लिए एनईएसएफआईसी 2026 का शुभारंभ
गुवाहाटी, 25 सितंबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने शुक्रवार को नॉर्थ ईस्ट सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज 2026 (एनईएसएफआईसी)-अष्टलक्ष्मी फॉर विकसित भारत का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य पूर्वोत्तर के युवाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और समस्या-समाधान क्षमता को वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान से जोड़ना है।
असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि एनईएसएफआईसी सरकार, युवा नवप्रवर्तकों और समाज के बीच संबंधों को नया स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य केवल नए उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों, सरकारी संस्थानों और उद्योगों के सामने मौजूद वास्तविक समस्याओं की पहचान कर तकनीक और रचनात्मकता के माध्यम से व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।
एनईएसएफआईसी के तहत 50 वास्तविक चुनौतियों की पहचान की गई है। इनमें 40 चुनौतियां सरकारी विभागों और 10 उद्योग संगठनों से संबंधित हैं। स्वास्थ्य, बाढ़ प्रबंधन, कृषि, शहरी जल निकासी, उपग्रह, ड्रोन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्रों को इसमें शामिल किया गया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने आठ चुनौतियां सामने रखी हैं, जिनमें गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप की शुरुआती पहचान, दूरदराज के क्षेत्रों में प्रसूति अल्ट्रासाउंड की सुविधा, प्रसव कक्षों में संक्रमण नियंत्रण, बीमार नवजातों की शीघ्र पहचान और जन्मजात विकृतियों का शुरुआती पता लगाना शामिल है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की चुनौतियों में फसल स्वास्थ्य की निगरानी, आर्द्रभूमि का मानचित्रण, सरकारी भूमि पर अतिक्रमण का पता लगाना तथा बाढ़ प्रबंधन और पूर्व चेतावनी के लिए डिजिटल ट्विन विकसित करना शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनईएसएफआईसी का एक प्रमुख उद्देश्य युवा स्टार्टअप को सरकारी बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार युवा नवप्रवर्तकों के लिए शुरुआती ग्राहक की भूमिका निभा सकती है, जिससे उनके समाधानों को विचार के स्तर से वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने का मार्ग तैयार होगा।
एनईएसएफआईसी के तहत नवंबर के अंत में गुवाहाटी में होने वाले नॉर्थ ईस्ट इनोवेशन कॉन्क्लेव में 150 स्टार्टअप का चयन किया जाएगा। 50 चुनौतियों में से प्रत्येक के लिए तीन स्टार्टअप चुने जाएंगे। चयनित स्टार्टअप को असम स्टार्टअप नीति के तहत शुरुआती स्तर पर सहायता, संबंधित विभागों के साथ काम करने का अवसर, डेटा और परीक्षण स्थलों की सुविधा तथा मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
फरवरी 2027 में आयोजित होने वाले डेमो डे में प्रत्येक चुनौती के लिए सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप को न्यूनतम व्यवहार्य उत्पाद (एमवीपी) विकसित करने के लिए 20 लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा। वहीं, डीप-टेक्नोलॉजी समाधान के लिए 40 लाख रुपये तक का अनुदान उपलब्ध होगा।
डॉ. सरमा ने कहा कि पूर्वोत्तर प्रौद्योगिकी और समस्या-समाधान के लिए भारत की महत्वपूर्ण प्रयोगशाला के रूप में उभर सकता है। उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों और आईटीआई सहित उच्च शिक्षण संस्थानों से एनईएसएफआईसी में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान असम और पूर्वोत्तर के स्टार्टअप एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए तीन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। पहला समझौता आईआईएम कोलकाता इनोवेशन पार्क और असम स्टार्टअप के बीच तीन वर्षीय त्वरक कार्यक्रम के लिए हुआ। दूसरा समझौता एसटीपीआई और असम स्टार्टअप के बीच गुवाहाटी में उद्यमिता केंद्र स्थापित करने से संबंधित है।
तीसरा समझौता इंडिया एक्सेलेरेटर के साथ हुआ, जिसके तहत पूर्वोत्तर के स्टार्टअप के लिए 100 करोड़ रुपये तक का फंड पूल स्थापित करने की योजना है। असम स्टार्टअप इस पहल में सक्षमकारी और ज्ञान साझेदार के रूप में कार्य करेगा।
कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, टीएसएटी के मैन्युफैक्चरिंग एक्सीलेंस एंड ऑपरेशंस प्रमुख टिम मैकइंटोश तथा उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

