खांडू ने सरकारी कर्मचारियों को दी चेतावनी, राष्ट्रीय प्रोजेक्ट का विरोध न करें
इटानगर, 22 सितंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रेदश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा कि उनकी सरकार प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट पर बातचीत के लिए तैयार है, उन्होंने उन लोगों से अधिकारियों के पास जाकर स्पष्टीकरण मांगने को कहा जिन्हें इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई शक है। साथ ही,उन्होंने सरकारी कर्मचारियों को चेतावनी दी कि वे इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट के खिलाफ कोई विचार न फैलाएं और न ही उसका विरोध करें।
खांडू ने कहा कि प्रोजेक्ट से जुड़ी चिंताओं पर चर्चा की जा सकती है और उन्हें स्पष्ट किया जा सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सरकार प्रभावित इलाकों के लोगों के साथ बातचीत करने को तैयार है।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे प्रोजेक्ट के खिलाफ अभियान चलाने वाले सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को सरकार के निर्देशों का पालन करना ही होता है।
उन्होंने कहा, मैं सभी से अपील करता हूं कि वे सरकार के आदेश का पालन करें और इस राष्ट्रीय प्रोजेक्ट का समर्थन करें।
उनके ये बयान सियांग और अपर सियांग के कुछ हिस्सों में प्रस्तावित प्रोजेक्ट के विरोध के बीच आए हैं। इस विरोध में प्री-फिजिबिलिटी से जुड़ी गतिविधियों और पैरामिलिट्री फोर्स की तैनाती पर भी आपत्तियां शामिल हैं।
तैनाती को लेकर जताई गई चिंताओं पर बात करते हुए खांडू ने स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलने के महत्व को माना। उन्होंने कहा कि हालांकि, यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय महत्व का है, लेकिन ज़मीन आखिरकार स्थानीय लोगों की ही है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बांध से प्रभावित इलाकों में लगभग 75-80% लोगों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो उनके अनुसार प्रोजेक्ट के लिए समर्थन दिखाता है। उन्होंने माना कि गेकू के कुछ लोगों ने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
ज्ञात हो कि खांडू ने सियांग और अपर सियांग ज़िलों के अधिकारियों के साथ प्रोजेक्ट, इसके महत्व और इससे जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर चर्चा करने के लिए एक सलाह-मशविरा वाली बैठक में शामिल हुए थे।
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में खांडू ने कहा कि आदिवासी अधिकारी अपने समुदायों से गहराई से जुड़े होते हैं और उनकी आकांक्षाओं, चिंताओं और भावनाओं को समझते हैं, जिससे विकास को आगे बढ़ाने में उनकी राय बहुत कीमती हो जाती है।
उन्होंने कहा कि इस बातचीत का मकसद न केवल प्रतिभागियों को प्रोजेक्ट को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना था, बल्कि समुदायों के बीच मौजूद सवालों, चिंताओं और आशंकाओं पर भी विचार-विमर्श करना था।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

