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कांडला में 2,300 करोड़ की ई-मेथनॉल परियोजना की आधारशिला स्थापित

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कांडला में 2,300 करोड़ की ई-मेथनॉल परियोजना की आधारशिला स्थापित


गुवाहाटी, 26 सितंबर (हि.स.)। असम ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी औद्योगिक भागीदारी को मजबूत करते हुए गुजरात के कांडला में एक बड़ी ई-मेथनॉल परियोजना की आधारशिला रखी। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ परियोजना का शिलान्यास किया। परियोजना को असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड और दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के संयुक्त प्रयास से स्थापित किया जाएगा।

प्रतिदिन 150 टन उत्पादन क्षमता वाली इस परियोजना पर 2,300 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। इससे 3,500 से अधिक युवाओं, इंजीनियरों और कुशल कर्मियों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। कांडला बंदरगाह पर बनने वाली परियोजना से उत्पादित ई-मेथनॉल का इस्तेमाल विदेश जाने वाले जहाजों के ईंधन के रूप में किया जाएगा। इससे आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और पोत परिवहन से होने वाले प्रदूषण को घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

गांधीधाम स्थित दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के प्रदर्शनी क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने कहा कि यह परियोजना भारत के हरित ईंधन अभियान में महत्वपूर्ण योगदान देगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत को वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन वाला देश बनाने के लक्ष्य की दिशा में देश में हरित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम का तेल एवं गैस क्षेत्र में पुराना योगदान रहा है। वर्ष 1867 में माकुम में एशिया का पहला यांत्रिक रूप से खोदा गया तेल कुआं स्थापित हुआ था, जबकि वर्ष 1901 में डिगबोई में देश की पहली तेल रिफाइनरी स्थापित की गई थी। उन्होंने कहा कि मेथनॉल उत्पादन के क्षेत्र में भी असम को करीब पांच दशक का अनुभव है और नामरूप स्थित असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड प्रतिदिन 500 टन तक मेथनॉल उत्पादन करने में सक्षम है।

डॉ. सरमा ने कहा कि केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के आमंत्रण पर असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड ने कांडला परियोजना में भागीदारी स्वीकार की। उन्होंने इसे असम के लिए गौरव का विषय बताते हुए उम्मीद जताई कि देश के अन्य बंदरगाहों पर भी भविष्य में इसी प्रकार की हरित ईंधन परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने असम और गुजरात के बीच पुराने सांस्कृतिक एवं आर्थिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में असम और पूर्वोत्तर के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उन्होंने गुजरात के लोगों को प्रधानमंत्री मोदी देने के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में असम और पूर्वोत्तर के परिवर्तन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, गुजरात सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक, दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण के अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह, असम पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड के अध्यक्ष बिकुल डेका सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश