बीटीसी सचिवालय के सभागार में कार्यकारी परिषद की बैठक
कोकराझार (असम), 05 सितम्बर (हि.स.)। बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) में सरकारी स्तर पर कैटल मार्केट (पशु हाट) शुरू होने के बाद वहां खरीदे-बेचे जाने वाले मवेशियों को लेकर अवैध कारोबार शुरू होने के आरोप सामने आए हैं। इस मुद्दे पर शनिवार को बीटीसी सचिवालय के सभागार में बीटीसी प्रमुख हग्रामा महिलारी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यकारी परिषद की बैठक में विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए हग्रामा महिलारी ने स्वयं पशु हाटों में अनियमितता की शिकायतों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि बीटीसी ने निर्धारित सरकारी नियमों के तहत कैटल मार्केट स्थापित करने की अनुमति दी थी और इसके बाद विभिन्न स्थानों पर पशु हाट संचालित किए जा रहे हैं।
हालांकि, परबतझोरा और गोसाईगांव अनुमंडल के विभिन्न पशु हाटों में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिल रही हैं। आरोप है कि बाहरी क्षेत्रों से लोग आकर इन हाटों में मवेशियों की खरीद-बिक्री कर रहे हैं। साथ ही, गोसाईगांव और परबतझोरा के पशु हाटों से मवेशियों को बांग्लादेश भेजे जाने के भी आरोप सामने आए हैं।
हग्रामा महिलारी ने स्पष्ट कहा कि इस तरह की गतिविधियां तत्काल बंद होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित पशु हाटों को बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बीटीसी क्षेत्र के भीतर ही पशुओं की खरीद-बिक्री सीमित रखी जाएगी और इस संबंध में शनिवार को ही आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।
बीटीसी मुख्य द्वार से हटेंगे राजनीतिक-संगठनात्मक प्रतीक
वहीं, बीटीसी कार्यकारी परिषद की बैठक में बीटीसी सचिवालय के मुख्य द्वार को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। हग्रामा महिलारी ने बताया कि मुख्य द्वार पर अब किसी राजनीतिक दल या संगठन का प्रतीक चिह्न नहीं लगाया जाएगा।
मुख्य द्वार पर केवल बागुरुम्बा नृत्य और खाम वाद्य जैसे बोडो समाज की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले प्रतीक प्रदर्शित किए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि पहले बीटीसी के मुख्य द्वार पर एबीएसयू का प्रतीक चिह्न मौजूद था। बाद में एबीएसयू के साथ बीएलटी और एनडीएफबी के प्रतीक चिह्न लगाए जाने की बात कही गई थी। लेकिन सरकारी परिसर के मुख्य द्वार पर किसी भी दल या संगठन का प्रतीक न रखने का निर्णय लिया गया है।
हग्रामा महिलारी ने बताया कि ग्रीन फील्ड में दो नए गेट बनाए जाएंगे, जहां एबीएसयू, बीएलटी और एनडीएफबी के प्रतीकों के साथ-साथ बीटीसी में रहने वाले सभी जाति एवं समुदायों की सांस्कृतिक एकता और विविधता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

