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हग्रामा मोहिलारी ने मानस राष्ट्रीय उद्यान को 2026-27 पर्यटन सत्र के लिए पुनःखोला

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हग्रामा मोहिलारी ने मानस राष्ट्रीय उद्यान को 2026-27 पर्यटन सत्र के लिए पुनःखोला


हग्रामा मोहिलारी ने मानस राष्ट्रीय उद्यान को 2026-27 पर्यटन सत्र के लिए पुनःखोला


कोकराझार (असम), 02 अक्टूबर (हि.स.)। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शामिल मानस राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व को आज 2026-27 के पर्यटन सत्र के लिए औपचारिक रूप से पर्यटकों के लिए पुनः खोल दिया गया। मानस टाइगर रिजर्व के बांसबाड़ी रेंज में आयोजित उद्घाटन समारोह में बोडोलैंड प्रादेशिक परिषद (बीटीसी) के प्रमुख हग्रामा मोहिलारी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह में बीटीसी के वन एवं वन्यजीव विभाग के कार्यकारी सदस्य जेम्स बसुमतारी, पर्यटन विभाग के कार्यकारी सदस्य धीरज बर्गियारी, रेशम विभाग के कार्यकारी सदस्य कार्मेश्वर राय तथा विधायक थानेस्वर बसुमतारी और रूपम चंद्र रॉय सहित कई अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। वन एवं वन्यजीव विभाग, बीटीसी के सचिव कर्मदेव ब्रह्म तथा वन विभाग, बीटीसी की अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-सीएचडी एवं मानस टाइगर रिजर्व की फील्ड डायरेक्टर डॉ. सोनाली घोष भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं।

कार्यक्रम की शुरुआत बीटीसी प्रमुख हग्रामा मोहिलारी द्वारा ‘बोडोलैंड मानस हेरिटेज सेंटर’ की आधारशिला रखे जाने के साथ हुई। इसके बाद वन्यजीव संरक्षण, वन प्रबंधन और संरक्षण गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों को फील्ड गियर प्रदान किए गए।

सतत पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से हग्रामा मोहिलारी ने ‘मैजिकल मानस’ ईको शॉप का उद्घाटन किया। यह केंद्र स्थानीय स्तर पर निर्मित उत्पादों को प्रदर्शित एवं बढ़ावा देने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा। इससे मानस क्षेत्र से जुड़े स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और समुदायों को पर्यटन के माध्यम से अतिरिक्त आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

इस अवसर पर बीटीसी प्रमुख ने ‘मैजिकल मानस’ विजिटर ब्रोशर का भी विमोचन किया। ब्रोशर में मानस की जैव विविधता, वन्यजीव, पर्यटन आकर्षण तथा जिम्मेदार एवं प्रकृति-आधारित पर्यटन से संबंधित जानकारी दी गई है।

कार्यक्रम के दौरान ‘मानस साइक्लिंग प्वाइंट’ को भी हरी झंडी दिखाई गई। इससे पर्यटकों को राष्ट्रीय उद्यान की दक्षिणी सीमा के आसपास एक अतिरिक्त पर्यावरण-अनुकूल मनोरंजन गतिविधि उपलब्ध होगी। वहीं ‘मानस रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म सेंटर’ (मानस-आरटीसी) को मानस क्षेत्र में जिम्मेदार, टिकाऊ और समुदाय-केंद्रित पर्यटन को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया गया।

समारोह में प्रवेश द्वार पर स्थापित प्रतिमा का अनावरण भी किया गया। इसके बाद नए पर्यटन सत्र के लिए वाहन सफारी संचालन का औपचारिक शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के तहत हाथियों की लाइन-अप और उन्हें गन्ना खिलाने का आयोजन भी किया गया, जिसके माध्यम से वन्यजीव संरक्षण तथा वन्यजीवों के साथ जिम्मेदार व्यवहार के प्रति जागरूकता का संदेश दिया गया।

समारोह के अंतिम चरण में सफारी के लिए जिप्सी की लाइन-अप की गई। इसके बाद बीटीसी प्रमुख हग्रामा मोहिलारी सहित अन्य अतिथियों ने वाहन सफारी की। सफारी मार्ग में बांसबाड़ी/सेकेंड गेट, बुराबुरी, न्यू बुराबुरी और कुरीबील क्षेत्र शामिल रहे। इस दौरान अतिथियों ने मानस के समृद्ध जैव विविधता, वन्यजीवों और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव किया।

मीडिया से बातचीत में बीटीसी प्रमुख मोहिलारी ने कहा कि 2026-27 पर्यटन सत्र के लिए मानस राष्ट्रीय उद्यान के पुनः खुलने से वन्यजीव पर्यटन और संरक्षण के प्रति जागरूकता को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन गतिविधियों में स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ने से मानस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए आजीविका के अतिरिक्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है। उन्होंने मानस को प्रकृति-आधारित और जिम्मेदार पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में और मजबूत करने पर भी जोर दिया।

बीटीसी के वन एवं वन्यजीव विभाग के कार्यकारी सदस्य जेम्स बसुमतारी ने कहा कि वर्तमान अवधि में पर्यटकों की संख्या और राजस्व संग्रह दोनों में वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने संरक्षण, पर्यटन विकास और सामुदायिक भागीदारी के लिए निरंतर प्रयासों के साथ आने वाले वर्षों में पर्यटकों की संख्या तथा पर्यटन से होने वाले राजस्व में और वृद्धि की उम्मीद जताई।

मानस राष्ट्रीय उद्यान का 2026-27 पर्यटन सत्र के लिए पुनः खुलना वन्यजीव संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन, सामुदायिक भागीदारी और सतत आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के सामने मानस की समृद्ध प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करने का अवसर भी मिलेगा।

हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा