बीटीसी की नई भूमि नीति के खिलाफ ईस्ट आक्रासू ने उठाई आवाज
कोकराझार (असम), 16 सितम्बर (हि.स.)। बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) की नई भूमि नीति तथा जमीन की खरीद-बिक्री के लिए अनुमति संबंधी नियमों को लेकर विभिन्न राजनीतिक एवं जातिय संगठनों में असंतोष के बीच ईस्ट आक्रासू की कोकराझार जिला समिति ने मंगलवार की शाम को भूमि संबंधी नियमों को सरल, स्पष्ट एवं पारदर्शी बनाने की मांग की।
संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि बीटीसी प्रधान की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि 10 फरवरी, 2003 के बीटीसी समझौते से पहले क्षेत्र में रहने वाले लोगों के भूमि अधिकार सुरक्षित हैं। हालांकि, संगठन का आरोप है कि जमीनी स्तर पर लोगों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। 10 फरवरी, 2003 से पहले के भूमि संबंधी दस्तावेज होने के बावजूद जमीन खरीदने की अनुमति प्राप्त करने में लोगों को विभिन्न प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
संगठन ने आरोप लगाया कि अनुमति प्रक्रिया में जटिलता और अनावश्यक विलंब के कारण आम लोगों को आर्थिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ईस्ट आक्रासू की कोकराझार जिला समिति ने बीटीसी प्रशासन से भूमि संबंधी नियमों को सरल और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ पात्र लोगों की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की।
संगठन ने कहा कि भूमि संबंधी नियमों में स्पष्टता और पारदर्शिता से आम जनता को राहत मिल सकती है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया और आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो संगठन जनहित में लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने के लिए बाध्य होगा।
ईस्ट आक्रासू की कोकराझार जिला समिति के अध्यक्ष परिमल राय, महासचिव राजीव कुमार बरुवा तथा उपाध्यक्ष सबिन रॉय ने उपरोक्त बातें कही।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

