समय की घटनाओं को दर्ज करना महान कार्यों में से एक : आरपी कलिता
- आचार्य चूड़ामणि देव के ऐतिहासिक योगदान पर आधारित पुस्तक का विमोचन
कामरूप (असम), 21 अक्टूबर (हि.स.)। समय की घटनाओं को लिपिबद्ध कर सुरक्षित रखना महान कार्यों में से एक है। अंग्रेज दूरदर्शी थे और उन्होंने अपने कार्यों तथा घटनाओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण कर उन्हें संरक्षित रखा। इसी विशाल सूचना भंडार के बल पर वे काफी आगे बढ़ सके। हमें भी अपने समय की घटनाओं और महत्वपूर्ण तथ्यों को दर्ज कर समाज, राष्ट्र और आने वाली पीढ़ियों को समृद्ध करना चाहिए। भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता ने बुधवार को रंगिया के दलई मुरारा निवासी युवा समाजसेवी अखिलानंद भट्टाचार्य की पुस्तक ‘आचार्य चूड़ामणि देव के शिखर की खोज में...’ का विमोचन करते हुए यह बात कही।
कलिता ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों की खोज करना आसान काम नहीं है। उन्होंने लेखक अखिलानंद भट्टाचार्य के प्रयासों की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि यह पुस्तक रंगिया के इतिहास को समझने के लिए महत्वपूर्ण सामग्री उपलब्ध कराएगी।
श्रीश्री दक्षिणा काली मंदिर के अस्थायी सभाकक्ष में आयोजित विमोचन समारोह की अध्यक्षता प्रख्यात लेखक डिम्बेश्वर बरुवा ने की। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश डेका और ऋषि भट्टाचार्य ने किया।
इस अवसर पर रंगिया के विधायक भवेश कलिता ने कहा कि दीपतेश्वरी देवालय, कुर्ममाधव देवालय और दक्षिणा काली मंदिर से जुड़े आचार्य चूड़ामणि देव के वंशज अखिलानंद भट्टाचार्य ने अपनी पुस्तक के माध्यम से परिवार के सामाजिक योगदान से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने रखा है। उनका यह प्रयास सराहनीय है।
बोडोलैंड प्रादेशिक क्षेत्र (बीटीआर) के कार्यकारी सदस्य गणेश कछारी ने कहा कि यह पुस्तक आम लोगों के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी लाभान्वित करेगी। इससे क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद मिलेगी।
रंगिया समजिला आयुक्त नवजीत पाठक ने कहा कि अध्ययनशील और शोधपरक दृष्टिकोण के बिना तथ्यों से समृद्ध पुस्तक तैयार करना संभव नहीं है। उन्होंने लेखक से रंगिया के सभी देवालयों और धार्मिक स्थलों के इतिहास को समेटते हुए एक और पुस्तक प्रकाशित करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डिम्बेश्वर बरुवा ने कहा कि सरायघाट के ऐतिहासिक युद्ध में आचार्य चूड़ामणि देव के योगदान को असमवासी कभी नहीं भुला सकते।
दक्षिण रंगिया मिलन साहित्य सभा द्वारा प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन समारोह में ढाई सौ से अधिक लोग उपस्थित थे। लेखक की अपनी जड़ों की खोज के प्रयास से रंगिया के इतिहास में नई और महत्वपूर्ण जानकारियां जुड़ने पर उपस्थित लोगों ने संतोष व्यक्त किया।
------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

