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ईवीएम और चुनाव आयोग पर आरोप कांग्रेस की राजनीतिक हताशा का प्रतिबिंब: असम भाजपा

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ईवीएम और चुनाव आयोग पर आरोप कांग्रेस की राजनीतिक हताशा का प्रतिबिंब: असम भाजपा


गुवाहाटी, 28 अक्टूबर (हि.स.)। असम प्रदेश भाजपा ने बुधवार को आरोप लगाया कि नगांव लोकसभा उपचुनाव और सिलचर नगरपालिका चुनाव को लेकर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और चुनाव आयोग पर सवाल उठाना कांग्रेस की राजनीतिक हताशा और नेतृत्व की विफलता को दर्शाता है।

भाजपा के प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन से बुधवार को जारी बयान में पार्टी की मीडिया पैनलिस्ट रणीशा दत्ता ने कहा कि कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमजोरियों और जनता के बीच घटते समर्थन के कारणों का विश्लेषण करने के बजाय चुनावी व्यवस्था पर सवाल उठा रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जीत और हार स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन चुनावी परिणाम अपने पक्ष में नहीं आने पर ईवीएम और चुनाव आयोग को दोष देना जिम्मेदार राजनीति का परिचायक नहीं है।

दत्ता ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी राजनीतिक दल को विशिष्ट शिकायत होने पर तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर संवैधानिक एवं कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा लेने का अधिकार है। हालांकि, बिना प्रमाण चुनावी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।

उन्होंने कहा कि जोरहाट लोकसभा सीट से निर्वाचित गौरव गोगोई के लिए नगांव और सिलचर के चुनाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में ईवीएम पर आरोप लगाने के बजाय कांग्रेस नेतृत्व को अपने संगठन, पार्टी की एकजुटता और जमीनी जनाधार को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए। लोकसभा चुनाव में मिली सफलता से राज्य के सभी क्षेत्रों में जनसमर्थन सुनिश्चित नहीं होता। मतदाता प्रत्येक चुनाव में पार्टी की नीतियों, नेतृत्व और कार्यप्रदर्शन के आधार पर निर्णय लेते हैं।

भाजपा ने राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच समय-समय पर सामने आए मतभेदों का भी उल्लेख किया। पार्टी ने कहा कि कांग्रेस को आत्ममंथन, संगठनात्मक सुधार और जनता का विश्वास दोबारा हासिल करने की दिशा में काम करने की जरूरत है।

बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में असम सरकार की विकासात्मक पहल और भाजपा की जमीनी स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियों से पार्टी को जनता के साथ अपना संपर्क मजबूत करने में मदद मिली है।

दत्ता ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। चुनावी हार से सबक लेना, संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करना और जनता की अपेक्षाओं के प्रति जवाबदेह बने रहना राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना और जनादेश का सम्मान करना स्वस्थ लोकतंत्र की बुनियादी शर्त है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश