आपातकाल की बरसी पर भाजपा ने मनाया काला दिवस, कांग्रेस पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप
गुवाहाटी, 25 जून (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम प्रदेश ने 25 जून, 1975 को लगाए गए आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ पर आज पूरे राज्य में काला दिवस मनाया। इस अवसर पर भाजपा नेताओं ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने तथा संविधान की भावना के विरुद्ध कार्य करने का आरोप लगाया।
असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने पार्टी मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन से जारी बयान में कहा कि 1975 का आपातकाल सत्ता में बने रहने के लिए कांग्रेस द्वारा उठाया गया सबसे अलोकतांत्रिक कदम था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचलते हुए देश को राजनीतिक अंधकार के दौर में धकेल दिया था।
सैकिया ने कहा कि आपातकाल के दौरान न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और स्वतंत्र प्रेस की शक्तियों को सीमित कर दिया गया था। एक लाख से अधिक विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, जबकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंघ के अनेक नेताओं, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी भी शामिल थे, को जेल भेजा गया था।
उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी के निर्वाचन को अमान्य घोषित किए जाने के बाद लोकतांत्रिक परंपरा के अनुसार पद छोड़ने के बजाय उन्होंने देश में आपातकाल लागू कर दिया। सैकिया ने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया।
राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र के दामोदर देव सभागार में आयोजित किया गया। इस अवसर पर आपातकाल के दौरान जेल गए और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले 41 लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा, भाजपा असम प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया, प्रदेश प्रभारी हरीश द्विवेदी, विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास, मंत्री नीलिमा देवी और कौशिक राय सहित कई वरिष्ठ नेता एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने आपातकाल के दौर को याद करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक व्यवस्था की रक्षा के महत्व पर जोर दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

