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चुनावी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़कर अपनी राजनीतिक विफलता नहीं छिपा सकती कांग्रेस: भाजपा

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चुनावी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़कर अपनी राजनीतिक विफलता नहीं छिपा सकती कांग्रेस: भाजपा


गुवाहाटी, 29 अक्टूबर (हि.स.)। असम प्रदेश भाजपा के मुख्य प्रवक्ता किशोर उपाध्याय ने गुरुवार को कांग्रेस पर चुनावी हार के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को जिम्मेदार ठहराकर अपनी राजनीतिक विफलताओं को छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतपत्रों से हुए चुनावों में भी कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है, इसलिए चुनावी पराजय के लिए ईवीएम को दोष देना उचित नहीं है।

गुवाहाटी स्थित भाजपा के प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में उपाध्याय ने कहा कि हाल ही में घोषित सिलचर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को 42 में से केवल दो सीटें मिलीं। इन चुनावों में मतपत्रों का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में हुए विधान परिषद चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को इन चुनावों में भी केवल एक सीट मिली। हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जिला परिषद में भाजपा ने 143 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस को 56 सीटें मिलीं। इसी तरह पंचायत समितियों में भाजपा को 1,199 और कांग्रेस को 477 सीटें मिलीं।

ईवीएम के मुद्दे पर कांग्रेस के रुख की आलोचना करते हुए उपाध्याय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने भी मतपत्रों से होने वाले चुनावों की व्यवस्था में बदलाव की आवश्यकता महसूस की थी। उन्होंने दिनेश गोस्वामी की अध्यक्षता वाली चुनाव सुधार समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें ईवीएम के इस्तेमाल और चुनाव सुधारों पर चर्चा की गई थी।

एसआईआर पर कांग्रेस के आरोपों को किया खारिज

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर उपाध्याय ने कहा कि यह प्रक्रिया केवल भाजपा सरकार के कार्यकाल में शुरू नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1952, 1956, 1958-61, 1965-66, 1983-84, 1987-88, 1993 और 1995 में भी मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण किया गया था।

उन्होंने सात अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर के तीन चरणों में लगभग 95.40 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई। इनमें से करीब 13.39 करोड़ मतदाताओं के नाम विभिन्न कारणों से आगे की जांच के लिए चिह्नित किए गए। इनमें स्थायी रूप से निवास स्थान बदलने वाले, अनुपस्थित या लापता पाए गए, मृत घोषित मतदाता तथा एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत मतदाता शामिल हैं।

उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि जांच के लिए चिह्नित किए गए नामों और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम रूप से हटाए गए नामों को एक समान नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि मसौदा मतदाता सूची से नाम हटने, सत्यापन के लिए चिह्नित होने और अंतिम सूची से नाम काटे जाने के बीच अंतर है।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए, लेकिन एक ही व्यक्ति का नाम कई स्थानों पर दर्ज नहीं रहना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के पंजीकृत पते पर नहीं मिलने मात्र से उसे विदेशी या अवैध मतदाता नहीं माना जा सकता। ऐसे मामलों में नोटिस, सुनवाई, दस्तावेजों की जांच और अपील का अवसर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों का दिया हवाला

भाजपा प्रवक्ता ने पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन 20 विधानसभा क्षेत्रों में कथित तौर पर सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए, वहां तृणमूल कांग्रेस ने 13, कांग्रेस ने एक और भाजपा ने छह सीटें जीतीं। उन्होंने शमशेरगंज और लालगोला का उदाहरण देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की सूचना के बावजूद तृणमूल कांग्रेस विजयी हुई।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आलोचना को अनुचित बताते हुए उपाध्याय ने कहा कि निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। चुनावी प्रक्रिया में किसी भी अनियमितता की शिकायत ठोस साक्ष्यों के साथ निर्वाचन आयोग या संबंधित न्यायालय के समक्ष रखी जानी चाहिए।

उन्होंने कांग्रेस से अपनी संगठनात्मक कमजोरियों और जनसमर्थन में कमी के कारणों की समीक्षा करने का आग्रह किया। उपाध्याय ने कहा कि चुनाव जीतने पर लोकतंत्र को मजबूत और हारने पर उसे खतरे में बताने का कांग्रेस का रवैया स्वीकार्य नहीं है।

उन्होंने कहा कि भाजपा पारदर्शी चुनाव, शुद्ध मतदाता सूची, प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक के मतदान अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश