बिश्वजीत दैमारी ने शिवसागर विश्वविद्यालय में सात दिवसीय विरासत महोत्सव का किया उद्घाटन
शिवसागर (असम), 31 अक्टूबर (हि.स.)। असम के स्वदेशी एवं जनजातीय आस्था और संस्कृति मंत्री बिश्वजीत दैमारी ने शनिवार को शिवसागर विश्वविद्यालय में सात दिवसीय विरासत महोत्सव 'द लिविंग पास्ट' का उद्घाटन किया। वह कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
इस सप्ताहव्यापी महोत्सव का आयोजन असम सरकार के स्वदेशी एवं जनजातीय आस्था एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक अध्ययन निदेशालय (डीएचएएस) ने शिवसागर विश्वविद्यालय के सहयोग से किया है।
महोत्सव का उद्देश्य शैक्षणिक गतिविधियों, प्रदर्शनियों, स्वदेशी उत्पादों और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के प्रचार-प्रसार के माध्यम से असम की समृद्ध ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन करना है।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए मंत्री दैमारी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए असम के ऐतिहासिक अभिलेखों, पांडुलिपियों, स्वदेशी परंपराओं और पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विरासत संरक्षण के कार्य में युवाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण डीएचएएस के प्रकाशन 'खुनलुंग-खुनलाई बुरंजी' का मंत्री द्वारा विमोचन रहा।
शिवसागर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महादेव पाटगिरी ने स्वागत भाषण दिया। उद्घाटन समारोह में सत्रिया नृत्य सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, शैक्षणिक व्याख्यान, विरासत प्रदर्शनी और स्वदेशी उत्पादों का मेला भी आयोजित किया गया।
इस अवसर पर डीएचएएस की प्रभारी निदेशक डॉ. संगीता गोगोई, शहीद पियली फूकन कॉलेज, नामती की संस्थापक प्राचार्य मोहिनी महंत और पांडुलिपि विशेषज्ञ दिगंत हजारिका सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

