संस्कृत में शपथ लेने वाले राज्यों के मंत्रियों में पहले बने बिमल बोरा का सम्मान
गुवाहाटी, 06 जुलाई, (हि.स.)। असम के उद्योग, वाणिज्य एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री बिमल बोरा ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान, संस्कृति, दर्शन और सनातन विरासत की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने यह बात असम विधानसभा के केंद्रीय सभागार में संस्कृत भारती, उत्तर असम प्रांत द्वारा आयोजित विशेष सम्मान समारोह में कही।
मंत्री बोरा ने संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रसार के लिए कार्य कर रही संस्था संस्कृत भारती की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे परिष्कृत भाषाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि लगभग साढ़े तीन हजार वर्ष पूर्व रचित ऋग्वेद इसी भाषा में लिखा गया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि असम सहित पूरे देश में संस्कृत के प्रति नई जागरूकता, सम्मान और रुचि का सकारात्मक वातावरण बन रहा है।
समारोह में असम विधानसभा के उन 17 विधायकों में से 13 का सम्मान किया गया, जिन्होंने संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण की थी। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के संगठन मंत्री भवेन सैकिया ने बताया कि संस्कृत में शपथ लेने वाले देश के विभिन्न राज्यों के मंत्रियों में बिमल बोरा पहले मंत्री हैं।
कार्यक्रम को विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास, मंत्री जयंत मल्लबरुवा, मंत्री विश्वजीत दैमारी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर असम प्रांत के कार्यकारी खगेन सैकिया ने भी संबोधित किया। समारोह की अध्यक्षता संस्कृत भारती उत्तर असम प्रांत की अध्यक्ष डॉ. सुदेष्णा भट्टाचार्य ने की। इस अवसर पर सांसद एवं भाजपा असम प्रदेश अध्यक्ष दिलीप कुमार सैकिया, कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं प्राच्य अध्ययन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. प्रह्लाद जोशी, संस्कृत भारती के महासचिव पंकज शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति और 23 शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

