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भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष तवांग पहुंचे

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भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष तवांग पहुंचे


इटानगर, 31 अक्टूबर (हि.स.)। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष आज तवांग पहुंच गए। इन्हें भारतीय वायु सेना द्वारा नई दिल्ली से तवांग तक सुरक्षित पहुंचाया गया।

अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भगवान बुद्ध (शाक्यमुनि) के पवित्र अवशेषों को सुरक्षित रूप से पहुंचाने के लिए भारतीय वायु सेना का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, आपकी पेशेवर कार्यक्षमता, समर्पण और सेवा की बदौलत ही, अत्यधिक आध्यात्मिक महत्व वाला यह पल अरुणाचल प्रदेश और लाखों बौद्ध श्रद्धालुओं तक पहुंच पाया है।

इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने के लिए भारतीय वायु सेना का धन्यवाद।

यह अरुणाचल प्रदेश में एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत है। अगले तीन हफ्तों तक, इन अवशेषों को तवांग, बोमडिला और नामसाई में आम जनता के दर्शन के लिए रखा जाएगा।

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय से आए इन पवित्र अवशेषों का स्वागत किया। उन्होंने इसे अरुणाचल प्रदेश के लिए एक बहुत बड़ा सम्मान और राज्य के बौद्ध समुदाय के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में खांडू ने कहा, इन पवित्र अवशेषों का तवांग में स्वागत करना अरुणाचल प्रदेश के लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है। यह ऐतिहासिक अवसर भगवान बुद्ध की करुणा, शांति, ज्ञान और सार्वभौमिक भाईचारे की शाश्वत शिक्षाओं के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को और गहरा करे।

इन अवशेषों के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, मुख्यमंत्री ने बताया कि ये अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित प्राचीन 'पिपरहवा स्तूप' से प्राप्त हुए हैं। यह एक ऐसा पुरातात्विक स्थल है जिसका गहरा संबंध प्राचीन 'कपिलवस्तु' से है, जो शाक्य वंश की जन्मभूमि थी—जिस वंश से भगवान बुद्ध संबंधित थे।

इसके बाद, इन अवशेषों को आम जनता के दर्शन के लिए तवांग ले जाया गया। घोषित कार्यक्रम के अनुसार, इन अवशेषों को 1 से 7 नवंबर तक ऐतिहासिक तवांग मठ में, 8 से 13 नवंबर तक बोमडिला के थुबचोग गात्सेल लिंग मठ में और 14 से 20 नवंबर तक नामसाई के गोल्डन पैगोडा में प्रदर्शित किया जाएगा।

तवांग में 2 और 3 नवंबर को 'बौद्ध धर्म: हिमालयी क्षेत्र और उसके परे प्रसार' विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत और विदेशों के बौद्ध भिक्षु, विद्वान और प्रतिनिधि शामिल होंगे।

ये अवशेष 21 नवंबर को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय वापस आ जाएंगे।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी