भारत माला परियोजनाओं से असम में विकास को नई गति
गुवाहाटी, 16 मई, (हि.स.)। असम में भारतमाला परियोजना और असम माला 3.0 के तहत जारी सड़क एवं राजमार्ग निर्माण कार्य राज्य की कनेक्टिविटी व्यवस्था को तेजी से मजबूत कर रहे हैं। इन परियोजनाओं को पूर्वोत्तर भारत में आर्थिक गतिविधियों, व्यापारिक संपर्क और सामरिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
असम में राज्य सरकार और केंद्र की संयुक्त पहल के तहत 3,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 900 किलोमीटर से ज्यादा सड़कों के निर्माण और विकास का कार्य प्रगति पर है। परियोजनाओं का उद्देश्य शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों को भी बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।
इसी क्रम में राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के सिलचर-बुद्धनगर खंड को चार लेन में विस्तारित किया जा रहा है। वहीं, डिमा हसाओ जिले में 229 किलोमीटर लंबे आधुनिक और आपदा-प्रतिरोधी राजमार्ग का निर्माण जारी है। यह सड़क भूस्खलन और खराब मौसम की स्थिति में भी यातायात को सुचारु बनाए रखने में सहायक होगी।
इसके अतिरिक्त एनएच-306 के सिलचर-वैरेन्गते-सैरांग मार्ग पर चार लेन सड़क निर्माण का कार्य भी तेज गति से चल रहा है। इस परियोजना के पूर्ण होने पर असम और मिजोरम के बीच आवागमन और व्यापारिक संपर्क को विशेष मजबूती मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से यात्रा समय में कमी आएगी, परिवहन लागत घटेगी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी। पर्यटन, कृषि, चाय उद्योग और छोटे व्यापारिक क्षेत्रों को भी इसका व्यापक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क को सामरिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। इससे सुरक्षा बलों तथा आपातकालीन सेवाओं की त्वरित आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
हालांकि, भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय प्रभाव और संभावित विस्थापन को लेकर कुछ चिंताएं भी सामने आई हैं। विशेषज्ञों ने विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के संतुलन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई है।
भारत माला और असम माला 3.0 परियोजनाओं को असम को पूर्वोत्तर भारत के प्रमुख कनेक्टिविटी केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।-----------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

