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बाढ़ पीड़ितों के पास भारत सेवाश्रम संघ

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बाढ़ पीड़ितों के पास भारत सेवाश्रम संघ


बाढ़ पीड़ितों के पास भारत सेवाश्रम संघ


बाढ़ पीड़ितों के पास भारत सेवाश्रम संघ


गुवाहाटी, 05 अगस्त (हि.स.)।

असम में हाल ही में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए भारत सेवाश्रम संघ ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाया है। आपदा के समय सेवा प्रदान करने के लिए विश्वविख्यात इस संगठन ने अपनी विभिन्न शाखाओं के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री, चिकित्सा और आवश्यक सहायता पहुंचाकर मानव सेवा का एक उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया है।

प्रथम चरण में, भारत सेवाश्रम संघ की शिलांग शाखा की ओर से स्वामी पूर्णब्रतानंद महाराज ने जोरहाट में राहत वितरण के प्रभारी संन्यासी शिशिर महाराज को विभिन्न प्रकार की राहत सामग्री सौंपी। इसमें शुद्ध पेयजल, फिनाइल, साबुन, सूखा भोजन, साड़ियां, ब्लीचिंग पाउडर, चावल और स्प्रे मशीन सहित कई अन्य आवश्यक सामग्रियां शामिल थीं।

द्वितीय चरण में, शिलांग शाखा की पहल और डिब्रूगढ़ जिले के विराज भारत सेवाश्रम संघ के सहयोग से शिवसागर जिले के नेपाली खूंटी, बारमिरी गांव, नेमाई जान, गहन गांव, बेतबाड़ी बेलेही, बगाड़ीगुड़ी, जमुना पार सहित कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में व्यापक रूप से राहत सामग्री का वितरण किया गया। पीड़ित ग्रामीणों को कीचड़ साफ करने के लिए वाइपर, शुद्ध पेयजल, चावल, दाल, मच्छरदानी, चादर, प्लास्टिक की चटाई, कंबल, गंजी, नाइटी, साड़ियां, मेखेला-चादर और महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड बांटे गए।

संघ का यह प्रयास केवल राहत वितरण तक ही सीमित नहीं रहा। प्रभावित क्षेत्रों में एक स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया, जहां चिकित्सकों द्वारा मुफ्त स्वास्थ्य परीक्षण, चिकित्सा सेवाएं और आवश्यक दवाइयां वितरित की गईं। इसके परिणामस्वरूप, बाढ़ के बाद स्वास्थ्य जोखिम का सामना कर रहे कई लोगों को लाभ मिला।

भारत सेवाश्रम संघ के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह मानवीय सेवा कार्य यहीं समाप्त नहीं होता है। आगामी चरण में भी पीड़ितों के बीच और अधिक व्यापक स्तर पर राहत एवं पुनर्वास कार्य जारी रखने की योजना है। विशेष रूप से, शिलांग शाखा की ओर से एक पूरे गांव के पुनर्वास और उसकी जिम्मेदारी लेने के विषय पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मानव सेवा को अपना व्रत मानते हुए संघ ने भविष्य में भी बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़े रहने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर