श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विवि के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति, राज्यपाल के साथ मुख्यमंत्री ने लिया हिस्सा
गुवाहाटी, 06 सितंबर (हि.स.)।मुख्यमंत्री डॉ. हिमंतबिस्व सरमाने आज उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य की उपस्थिति में गुवाहाटी के खानापाड़ा स्थित ज्योति-विष्णु अंतरराष्ट्रीय कला मंदिर में आयोजित श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में भाग लिया।
समारोह को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति का दायित्व भी संभाल रहे मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया तथा डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और शिक्षकों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दीक्षांत समारोह में डिग्री और डिप्लोमा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी आने वाले दिनों में करुणा, संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ मानव सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें वर्ष 2007 में स्थापना के समय से ही इस विश्वविद्यालय से निकटता से जुड़े रहने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विश्वविद्यालय के सहयोग से राज्य में चिकित्सा शिक्षा की आधारभूत संरचना के निर्माण और पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण के माध्यम से व्यापक परिवर्तन की शुरुआत की है।
विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रगति की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में असम मेडिकल कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह के दौरान चिकित्सा शिक्षा के दूरदर्शी मार्गदर्शक डॉ. जॉन बेरी व्हाइट के नाम पर एमबीबीएस अंतिम परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थी के लिए एक विशेष पुरस्कार की घोषणा की गई थी। आज के समारोह में यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले वर्ष 2023 के सर्वश्रेष्ठ स्नातक डॉ. विकी दत्ता, वर्ष 2024 की डॉ. भाग्यश्री मोदी और वर्ष 2025 के डॉ. प्रीतम डेका को उन्होंने बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनकी शैक्षणिक उपलब्धियां पूर्वोत्तर में चिकित्सा शिक्षा के दूरदर्शी मार्गदर्शक की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाने के साथ राज्य में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र को भी प्रेरित करेंगी।
देश में चिकित्सा शिक्षा की बढ़ती लोकप्रियता के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 में देशभर में मेडिकल शिक्षा के इच्छुक परीक्षार्थियों की संख्या 14 लाख थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर लगभग 20 लाख हो गई है और इनमें से लगभग 56 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इसके विपरीत, देश में वर्तमान में केवल 1,39,864 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि इसके कारण विद्यार्थियों को मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश पाने के लिए काफी कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। मुख्यमंत्री ने राज्य केस्वास्थ्य क्षेत्र में हुई प्रगति पर विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए परिवर्तन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि वर्तमान में इनकी संख्या बढ़कर 846 हो गई है। इसी प्रकार एमबीबीएस सीटों की संख्या 51,348 से बढ़कर 1,39,864 और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या 31,185 से बढ़कर 86,360 हो गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी प्रयासों के साथ निजी क्षेत्र के सहयोग से भी राज्य में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं की आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि निजी क्षेत्र के दो मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति की प्रक्रिया भी चल रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में तेजी से विस्तार कर रही चिकित्सा शिक्षा रोजगार, मेडिकल टूरिज्म और उन्नत चिकित्सा सेवाओं की नई आधारभूत संरचना तैयार करने के साथ असम को चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।
असम से वैश्विक स्तर का मानव संसाधन तैयार करने पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ऐसा मानव संसाधन तैयार करने का उपयुक्त समय है, जो केवल राज्य की ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जरूरतों को पूरा कर सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत की जनसंख्या की औसत आयु 29 वर्ष है, जबकि, असम में यह केवल 23 वर्ष है। इसलिए आने वाले दो दशकों तक असम युवा आबादी से समृद्ध राज्य के रूप में विशिष्ट स्थिति में रहेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस जनसांख्यिकीय लाभ का उपयोग कर नर्सिंग, डेंटल और मेडिकल कॉलेजों में विश्वस्तरीय मानव संसाधन तैयार किया जा सके तो आने वाले कई दशकों तक असम की युवा पीढ़ी वैश्विक रोजगार बाजार में प्रासंगिक बनी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय प्रशासन से नर्सिंग शिक्षा के साथ जापानी भाषा जैसी विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण शुरू करने का आह्वान किया और घोषणा की कि इस दिशा में राज्य सरकार उदार वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।उन्होंने चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों को मेडिकल शिक्षा के साथ सॉफ्ट स्किल्स, अंग्रेजी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान और तकनीकी दक्षता से भी संपन्न बनाने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय इस चुनौती को स्वीकार करते हुए वैश्विक स्तर का मानव संसाधन तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
नवनियुक्त चिकित्सकों को समाज और देश के प्रति उनकी गहरी जिम्मेदारी का स्मरण कराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें चिकित्सा पेशे के नियमों का पालन करते हुए समयबद्धता, ईमानदारी, संवेदनशीलता और निष्ठा के साथ अपने कार्यक्षेत्र में समर्पित होकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेशेवर सफलता और करियर में प्रगति के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को कभी नहीं भूलना चाहिए। मुख्यमंत्री ने नए चिकित्सकों से अपने कार्यस्थल पर पेशेवर गरिमा बनाए रखते हुए समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की भी समर्पित भावना से सेवा करने का आह्वान किया।
समारोह में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान आदि विभाग के मंत्री अशोक सिंघल, शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगू, कई विधायक, मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, श्रीमंत शंकरदेव स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अनूप कुमार बर्मन सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं प्राध्यापिकाएं, अन्य गणमान्य व्यक्ति तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

