असम आबकारी नियमों में संशोधन, शराब दुकानों की दूरी और लाइसेंस स्थानांतरण के नए नियम लागू
गुवाहाटी, 13 जून, (हि.स.)। असम सरकार ने राज्य के आबकारी क्षेत्र में व्यापक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए असम आबकारी (संशोधन) नियमावली, 2026 लागू कर दी है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद जारी नई नियमावली के तहत शराब बिक्री, दुकानों की स्थापना, लाइसेंस स्थानांतरण तथा राजस्व संग्रहण से जुड़े कई नए प्रावधान लागू किए गए हैं। अधिसूचना जारी होने के साथ ही ये नियम पूरे राज्य में प्रभावी हो गए हैं।
नए नियमों के अनुसार भारतीय निर्मित विदेशी मदिरा (आईएमएफएल), बीयर और देशी शराब के थोक तथा खुदरा ऑफ-शॉप लाइसेंसधारकों के लिए न्यूनतम् सुनिश्चित राजस्व (एमजीआर) जमा करना अनिवार्य होगा। वित्तीय वर्ष को चार तिमाहियों में विभाजित कर क्रमशः 22, 25, 27 और 26 प्रतिशत राजस्व वसूला जाएगा। निर्धारित राजस्व जमा नहीं करने पर बकाया राशि पर 10 प्रतिशत जुर्माना तथा विलंब होने पर प्रति माह 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज देना होगा।
संशोधित नियमों में शराब दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी को भी सख्ती से निर्धारित किया गया है। इसके तहत कामरूप (मेट्रो) जिले में दो खुदरा शराब दुकानों के बीच कम से कम 500 मीटर, अन्य नगर निगम, नगरपालिका और नगर समिति क्षेत्रों में एक किलोमीटर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में दो किलोमीटर की दूरी अनिवार्य होगी।
खुदरा ऑफ-शॉप में केवल सीलबंद और कैप्सूलयुक्त 180 मिलीलीटर या उससे अधिक क्षमता वाली बोतलों में ही शराब बिक्री की अनुमति होगी। वहीं बार सहित ऑन-शॉप प्रतिष्ठानों में न्यूनतम 750 मिलीलीटर की बोतलों का उपयोग करना होगा। ग्राहकों को शराब परोसने के लिए पेग माप का उपयोग किया जा सकेगा और एक पूर्ण पेग 60 मिलीलीटर निर्धारित किया गया है।
दुकानों के स्थानांतरण संबंधी नियमों में भी बदलाव किया गया है। किसी जिले के भीतर, नगर निगम क्षेत्र से बाहर स्थित दुकान को आबकारी आयुक्त की पूर्व स्वीकृति के बाद जिला आयुक्त स्थानांतरित करने की अनुमति दे सकेंगे। नगर निगम क्षेत्रों में स्थानांतरण के लिए राज्य सरकार की मंजूरी आवश्यक होगी। अब ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों या नगरपालिका क्षेत्रों में शराब दुकान स्थानांतरित नहीं की जा सकेगी, हालांकि शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानांतरण की अनुमति रहेगी।
अंतर-जिला स्थानांतरण के मामले में कामरूप (मेट्रो) से अन्य जिलों में दुकान स्थानांतरित की जा सकेगी, लेकिन अन्य जिलों से कामरूप (मेट्रो) में स्थानांतरण की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा लाइसेंस प्राप्त करने के तीन वर्ष के भीतर किसी भी अंतर-जिला स्थानांतरण पर रोक रहेगी।
नियमावली में असम की पारंपरिक जनजातीय समुदायों द्वारा निर्मित विरासत मदिरा को भी संरक्षण दिया गया है। इसके तहत माइक्रोमैन्युफैक्टरी की अधिकतम उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1,000 लीटर निर्धारित की गई है तथा विभिन्न श्रेणियों के लाइसेंस शुल्क में उल्लेखनीय कमी की गई है।
संशोधित नियमों में ‘असम मेड लिकर’ नामक नई श्रेणी भी जोड़ी गई है। इसकी अल्कोहल क्षमता 17.12 प्रतिशत वी/वी निर्धारित की गई है। इसके लिए विनिर्माण लाइसेंस आवेदन शुल्क एक लाख रुपये तथा वेंड लाइसेंस शुल्क 50 हजार रुपये तय किया गया है।
सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से राज्य में शराब कारोबार का बेहतर नियमन, सरकारी राजस्व में वृद्धि तथा अनधिकृत लाइसेंस स्थानांतरण पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

