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असमः विभिन्न हिस्सों में रंगाली बिहू की तैयारी जारी

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असमः विभिन्न हिस्सों में रंगाली बिहू की तैयारी जारी


-बोकाखात में जातीय विद्यालय में 'बहाग बिहू' का स्वागत

गुवाहाटी, 11 अप्रैल (हि.स.)। असम में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब राज्यभर में असमिया संस्कृति के सबसे प्रमुख पर्व रंगाली बिहू (बहाग बिहू) को लेकर तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इस पर्व के आगमन में अब कुछ ही दिन शेष हैं, ऐसे में गांव-शहर हर जगह सांस्कृतिक माहौल बनता जा रहा है।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में बिहू के स्वागत को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं। ढोल, पेपा और पारंपरिक बिहू नृत्य की कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं।

इसी क्रम में शनिवार को बोकाखात स्थित बोकाखात जातीय विद्यालय में “बहाग बिहू स्वागत” कार्यक्रम का आयोजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। विद्यालय परिसर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस आयोजन ने सभी का मन मोह लिया।

विद्यालय प्रशासन ने हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी छात्रों को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। चूंकि 13 अप्रैल से 18 अप्रैल तक विद्यालय बंद रहेगा, इसलिए अवकाश से पहले ही छात्रों में जातीय चेतना और सांस्कृतिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करने के लिए यह पहल की गई।

विद्यालय परिसर सुबह से ही ढोल, पेपा और गगना की मधुर धुनों से गूंजता रहा। वर्तमान छात्रों के साथ-साथ पूर्व छात्र, शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक और स्थानीय लोग पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए और उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान एक जोड़ी द्वारा पारंपरिक हुसरी की प्रस्तुति दी गई, जिसमें ढोल- पेपा की गूंज के साथ बिहू नृत्य की मनमोहक झलक देखने को मिली। हुसरी बिहू नृत्य की एक विशेष शैली है, जो इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।

विद्यालय का यह प्रयास न केवल छात्रों को असमिया लोक-संस्कृति से जोड़ रहा है, बल्कि नई पीढ़ी को बिहू के वास्तविक महत्व से परिचित कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना की है।

उल्लेखनीय है कि असम के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही, रंगाली बिहू के मुख्य आयोजनों के लिए पंडालों का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है, जहां नृत्य, गीत और विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय