पूसीरे ने सुरक्षित ट्रेन यात्रा के लिए संरक्षा उपायों को किया सुदृढ़
गुवाहाटी, 22 अगस्त (हि.स.)। यात्रा के दौरान यात्रियों की बेहतर सुरक्षा, आराम और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) प्रतिबद्ध है। भारतीय रेल की चल रही आधुनिकीकरण के प्रयासों के तहत, पूसीरे में चलने वाली सभी लंबी दूरी की रेल गाड़ियों को पारंपरिक आईसीएफ कोच से आधुनिक लिंक हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच में परिवर्तित करने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है।
इस बदलाव के पूर्ण होने के साथ, अब लंबी दूरी के ट्रेनों की कुल संख्या 103 हो गई है, जिनमें पूसीरे की 55 और अन्य रेलवे ज़ोन की 48 ट्रेन सेवाएं शामिल हैं। इस उपलब्धि से पूसीरे अपनी लंबी दूरी की ट्रेन सेवाओं के लिए पूर्णतः एलएचबी अनुकूल हो गया है। एलएचबी कोचों को इन ट्रेनों में लगाया जाना, यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने, यात्रा को आरामदायक बनाने और कामकाज की क्षमता को बेहतर करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह सुरक्षित और आधुनिक रेल सेवा प्रदान करने के भारतीय रेल के संकल्प के अनुरूप है।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज बताया है कि ये अत्याधुनिक एलएचबी कोच बेहतरीन संरक्षा सुविधाओं जैसे फायर एंड स्मॉक डिटेक्शन सिस्टम (एफएसडीएस), फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) और एरोसोल-बेस्ड फायर डिटेक्शन सिस्टम से लैस हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होती है। कुल 1226 एलएचबी एसी कोच में एफएसडीएस और 155 पावर कार एवं 79 पैंट्री कार में एफडीएसएस लगाए गए हैं।
इसके अलावा, 3436 एसी कोच में एरोसोल-बेस्ड फायर डिटेक्शन सिस्टम लगाए गए हैं। ये फायर डिटेक्शन सिस्टम रेलगाड़ियों के कोच के भीतर मुख्य स्थानों पर निरंतर नज़र रखते हैं, ताकि आग लगने की किसी भी घटना का पता चल सके और समय पर कार्रवाई के लिए तत्काल अलार्म बज सके। आग का शीघ्र और सही पता चलने से न केवल यात्रियों में अफरा-तफरी और घायल होने की घटना को रोकने में मदद मिलती है, बल्कि जान-माल का नुकसान भी कम होता है और ट्रेन सेवाओं में रुकावट भी कम होती हैं। आग से सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए, सभी पावर कार, पैंट्री कार और एसीकोच में फायर प्रोटेक्शन सिस्टम चरणबद्ध तरीके से लगाए जा रहे हैं।
रेल संरक्षा को बेहतर बनाना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है तथा इसे और अधिक बेहतर बनाने के प्रयास लगातार हो रहे हैं। नियमित संरक्षा अभियानों के अलावा, रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का समय-समय पर संरक्षा ऑडिट और निरीक्षण किए जाते है, ताकि परिसंपत्तियों के अनुरक्षण, संरक्षा प्रक्रियाओं और प्रणाली की कमियों का पता लगाया जा सके। ये आकलन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपाय लागू करने में मदद करते हैं। पूसीरे अपने पूरे नेटवर्क में संरक्षा के उच्चतम स्तर को सुनिश्चित करने को पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

