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असम के प्राकृतिक जलाशयों में मखाना की खेती को मिलेगा बढ़ावा, 30 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित

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असम के प्राकृतिक जलाशयों में मखाना की खेती को मिलेगा बढ़ावा, 30 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित


गुवाहाटी, 06 नवंबर (हि.स.)। असम सरकार राज्य के प्राकृतिक जलाशयों और बीलों में मखाना (फॉक्स नट) की खेती को बढ़ावा देने के लिए पायलट परियोजना शुरू करने जा रही है। कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने शुक्रवार को इसकी घोषणा करते हुए कहा कि कृषि विभाग ने राज्य में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है।

गुवाहाटी स्थित असम प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय (एएएससी) में मत्स्य विभाग के सहयोग से आयोजित प्राकृतिक जलाशयों के पट्टाधारकों की उच्चस्तरीय संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने यह घोषणा की।

हजारिका ने बताया कि राज्य के सात से आठ बीलों में पहले से ही मखाना की खेती की जा रही है। अब इस पहल को अन्य जलाशयों तक विस्तारित करने की योजना है, ताकि पारंपरिक मछुआरा समुदायों की आय में वृद्धि हो सके। प्रारंभिक चरण में असम मत्स्य विकास निगम लिमिटेड (एएफडीसी) के अधीन संचालित 186 मत्स्य जलाशयों में से 30 प्रतिशत में मखाना की प्रायोगिक खेती की जाएगी।

उन्होंने जलाशयों से जलकुंभी हटाने पर जोर देते हुए कहा कि मछली उत्पादन और मखाना की खेती, दोनों के लिए जलाशयों का स्वच्छ रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य के प्राकृतिक जलाशयों के संरक्षण और सुरक्षा की जिम्मेदारी जल संसाधन विभाग को भी सौंपी गई है।

मंत्री ने मखाना की खेती की आर्थिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 25 बीघा के एक बील से मखाना उत्पादन के जरिए सालाना 25 लाख रुपये तक की आय अर्जित की जा सकती है। उन्होंने इस पहल में रुचि रखने वाले किसानों और मछुआरा समुदायों को सरकार की ओर से पूरा सहयोग तथा विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

हजारिका ने कहा कि मखाना एक उभरता हुआ वैश्विक सुपरफूड है और पश्चिमी देशों के बाजारों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने किसानों की आय को टिकाऊ बनाने के लिए कृषि गतिविधियों में विविधता लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके साथ ही बीलों में नियमित रूप से मछलियों के बीज डालने को मत्स्य उत्पादन और पारंपरिक मछुआरा समुदायों की आजीविका बनाए रखने के लिए जरूरी बताया।

बैठक में मत्स्य मंत्री नीलिमा देवी, असम मत्स्य विकास निगम के अध्यक्ष गुरज्योति दास तथा कृषि एवं मत्स्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश