राहुल गांधी, पलायन मत कीजिए, बहस से मत डरिए : मंत्री पीयूष हज़ारिका
गुवाहाटी, 11 अगस्त (हि.स.)। झारखंड की राजधानी रांची में अपने न्यायोचित अधिकारों की मांग तथा झारखंड लोक सेवा परीक्षाओं में कथित व्यापक अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित बर्बर पुलिसिया कार्रवाई की असम सरकार के मंत्री पीयूष हजारिका ने कड़ी निंदा की।
मंत्री पीयूष हज़ारिका ने मंगलवार काे अटल बिहारी वाजपेयी भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि निहत्थे और निर्दोष छात्रों के विरुद्ध कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार द्वारा कथित रूप से की गई दमनात्मक एवं बलपूर्वक कार्रवाई ने देश की लोकतांत्रिक चेतना तथा मानवता की अंतरात्मा को भी शर्मसार किया है।
मंत्री ने कहा कि झारखंड के छात्र अपने भविष्य, अधिकारों तथा रोजगार के अवसरों के लिए अत्यंत शांतिपूर्ण, गरिमापूर्ण और अनुशासित ढंग से आंदोलन कर रहे थे। रांची में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मार्ग में कथित रूप से कंटीले तारों की बैरिकेडिंग किए जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए, रात के अंधेरे में भी उनका पीछा कर निर्ममता से लाठीचार्ज किया गया तथा निर्दयतापूर्वक वाटर कैनन का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि टेलीविजन चैनलों पर प्रसारित दृश्यों में कथित कार्रवाई के दौरान कुछ महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े तक फटे हुए दिखाई दिए। इसके बावजूद, उन्होंने कहा, स्वयं को छात्रों के अधिकारों का प्रहरी बताने वाले तथाकथित छात्र नेता, स्वयंभू बुद्धिजीवी तथा राहुल गांधी, कथित रूप से प्रताड़ित छात्रों की करुण पुकार के प्रति आज पूरी तरह मौन हैं।
हज़ारिका ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी का एकमात्र उद्देश्य प्रत्येक परिस्थिति को राजनीतिक लाभ के लिए भुनाना तथा देश में अस्थिरता और अराजकता का वातावरण निर्मित करना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) झारखंड के युवाओं और छात्र समुदाय के साथ चट्टान की भांति दृढ़ता से खड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस, जेएमएम सरकार को आंदोलनरत छात्रों की न्यायोचित मांगों का तत्काल समाधान करते हुए उन्हें पूरा करना चाहिए।
मंत्री ने कहा, “रांची में भर्ती संबंधी अनियमितताओं और कथित प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों एवं युवाओं पर राहुल गांधी के निर्देश पर बर्बर अत्याचार किए जाने की सूचना भी सामने आई है। दिल्ली के जंतर-मंतर की घटनाओं पर राजनीति करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले राहुल गांधी आज झारखंड के छात्रों की करुण पुकार के प्रति पूर्णतः बहरे क्यों हैं?”
उन्होंने प्रश्न किया कि दिल्ली में छात्रों के प्रति कथित कृत्रिम सहानुभूति प्रदर्शित करने वाले राहुल गांधी को झारखंड जाकर कथित रूप से प्रताड़ित छात्रों की सुध लेने का समय क्यों नहीं मिला।
मंत्री हज़ारिका ने कहा कि राहुल गांधी को छात्रों के भविष्य की वास्तविक चिंता नहीं है और वे केवल सुविधावादी राजनीति करना चाहते हैं। जहां कांग्रेस की सरकारों में पुलिस द्वारा कथित रूप से दमन किया जाता है, वहां राहुल गांधी मौन धारण कर लेते हैं; और जहां उन्हें राजनीतिक लाभ की संभावना दिखाई देती है, वहां वे राजनीतिक नाट्य का मंचन करते हैं। मंत्री ने आगे सवाल किया कि अपने अधिकारों और भविष्य की मांग को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने वाले युवा समुदाय पर ऐसी निर्मम दमनात्मक कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने पूछा कि क्या छात्रों के प्रति कांग्रेस का समर्थन अब राजनीतिक सुविधा और कथित गुप्त राजनीतिक गणनाओं पर निर्भर करेगा?
झारखंड के छात्रों के साथ कथित बर्बर व्यवहार की कड़ी भर्त्सना करते हुए मंत्री हज़ारिका ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी को देश के युवाओं से अपने पाखंडपूर्ण एवं दोहरे मापदंड वाली राजनीति के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि इस मुद्दे पर राहुल गांधी को देशवासियों के समक्ष जवाब देना ही होगा।
पीयूष हज़ारिका ने आरोप लगाया कि पिछले 15 दिनों से राहुल गांधी बार-बार कथित रूप से असत्यपूर्ण बयान देकर भ्रम उत्पन्न कर रहे हैं तथा लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद की कार्यवाही को बाधित कर रहे हैं। मंत्री के अनुसार, उनका उद्देश्य न तो सार्थक संवाद है और न समाधान, बल्कि अराजकता उत्पन्न करना है; यही कारण है कि वे प्रतिदिन अपने दावों और उद्देश्यों को बदलते जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि प्रारंभ में राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। इसके बाद उन्होंने संसद में नीट के विषय पर चर्चा की मांग करते हुए सदन की कार्यवाही बाधित करनी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए केंद्र सरकार ने न केवल चर्चा के लिए तत्परता दिखाई, बल्कि प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध कानून को भी और अधिक कठोर बनाया। इसके बाद राहुल गांधी ने जंतर-मंतर की घटना के संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री के वक्तव्य की मांग की।
पीयूष हज़ारिका ने कहा कि सरकार ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा था,“संसद को चलने दीजिए, गृह मंत्री सदन के पटल पर उत्तर देंगे।” किंतु, उन्होंने आरोप लगाया, विपक्ष ने जानबूझकर संसद को चलने नहीं दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तथा केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के बावजूद कि गृह मंत्री सदन में प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देंगे, राहुल गांधी ने, उनके आरोप के अनुसार, पुनः,अपना लक्ष्य बदल दिया। मंत्री ने राहुल गांधी द्वारा सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता का भी उल्लेख किया।”
मंत्री ने आरोप लगाया कि वास्तव में राहुल गांधी नहीं चाहते कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में उत्तर दें। उनका दावा था कि राहुल गांधी को आशंका है कि यदि सदन में सार्थक बहस हुई और गृह मंत्री ने सभी तथ्य सदन के समक्ष रख दिए, तो राहुल गांधी द्वारा कथित रूप से निर्मित भ्रामक सूचनाओं और छलावे का पूरा जाल देश के सामने तार-तार हो जाएगा।
देश के युवा समुदाय ने कांग्रेस के इस कथित दोहरे चरित्र और राजनीतिक पाखंड को समझना प्रारंभ कर दिया है, ऐसा उल्लेख करते हुए मंत्री पीयूष हज़ारिका ने कहा कि राहुल गांधी की कथित रूप से असत्य की नींव पर खड़ी राजनीति को बहुत शीघ्र ही देश की जनता के समक्ष निर्णायक अस्वीकृति का सामना करना पड़ेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

