पूसीरे ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उठाए सक्रिय कदम
गुवाहाटी, 04 अक्तूबर (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने तकनीक आधारित प्रणाली, बेहतर निगरानी और वन विभाग के साथ निकट समन्वय के जरिए ट्रेन-हाथी की टक्कर को रोकने के अपने प्रयासों को तेज़ कर दिया हैं। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच, पूसीरे कर्मचारियों की समय पर की गई कार्रवाई से विभिन्न मंडलों में 255 हाथियों की जान बचाई जा सकी। इनमें अलीपुरद्वार मंडल में 106, रंगिया में 14, लामडिंग में 122 और तिनसुकिया मंडल में 15 हाथी शामिल थे।
पूसीरे ने संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रेन-हाथी की टक्कर को रोकने के लिए कई सक्रिय और तकनीक पर आधारित कदम उठाए हैं। इनमें डिस्ट्रिब्यूटेड एकोस्टिक सिस्टम (डीएएस) तकनीक का उपयोग करके एआई-बेस्ड इंट्रूज़न डिटेक्शन सिस्टम (आईडीएस) स्थापित करना शामिल है, जो रेल पटरी के पास हाथियों की हलचल के बारे में तुरंत अलर्ट प्रदान करता है।
बचाव के अन्य उपायों में हाथियों के दिखने पर रात्रिकालीन और अस्थायी रूप से गति पर रोक लगाना, बेहतर पेट्रोलिंग, ट्रेन क्रू को जागरूक करना, चेतावनी वाले साइन लगाना, झाड़ियों को हटाना और वन विभाग के साथ सटीक समय पर तालमेल बिठाना शामिल है। रेल पटरियों से हाथियों को दूर रखने के लिए मधुमक्खियों की तेज़ आवाज़ का उपयोग करने वाला 'प्लान बी' सिस्टम भी संवेदनशील स्थानों पर लगाया गया है। पूसीरे ने वन्य जीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए और हाथियों को रेल पटरियों से दूर रखने के लिए चयनित स्थानों पर अंडरपास भी बनाए हैं।
पूसीरे ट्रेन क्रू, रेल कर्मचारी, पैंट्री कार के कर्मचारियों और यात्रियों को निरंतर जागरूक कर रहा है, ताकि रेल पटरी के पास खाने-पीने का अवशिष्ट न फेंका जाए, क्योंकि इससे हाथी और अन्य जीव आकर्षित हो सकते हैं। वन विभाग के साथ निरंतर समन्वय और रियल-टाइम संवाद से हाथियों की आवाजाही का पता लगने पर समय रहते कार्रवाई करना आसान हो जाता है।
ट्रेन-हाथी की टक्कर से जुड़े सभी मामलों को काफी गंभीरता से लिया जाता है और तय सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार उसकी जांच की जाती है। पूसीरे, पूर्वोत्तर में सुरक्षित और सुचारू ट्रेन परिचालन सुनिश्चित करते हुए हाथियों की सुरक्षा के लिए तकनीक आधारित निगरानी, ज़मीनी स्तर पर सतर्कता और वन्यजीव अधिकारियों के साथ समन्वय को निरंतर मज़बूत कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

