पूसीरे ने अपने क्षेत्र में चलने वाली लंबी दूरी की सभी ट्रेनों काे शत-प्रतिशत एलएचबी में बदला
गुवाहाटी, 13 जुलाई (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने यात्री सेवा को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और बड़ा माइलस्टोन दर्ज किया है। पूसीरे पर चलने वाली लंबी दूरी की सभी यात्री ट्रेनों को पारंपरिक आईसीएफ कोच से आधुनिक लिंके हॉफमैन बुश (एलएचबी) कोच में सफलतापूर्वक बदला गया है। इस बदलाव से, लंबी दूरी की कुल 103 यात्री ट्रेनें (जिनमें पूसीरे जोनकी 55 और अन्य रेलवे ज़ोन की 48 ट्रेनें शामिल हैं) अब एलएचबी कोच के साथ चल रही हैं। इससे यह ज़ोन लंबी दूरी की अपनी ट्रेन सेवाओं के लिए पूरी तरह से एलएचबी युक्त हो गया है। यह उपलब्धि पूरे नेटवर्क पर यात्रियों की सुरक्षा, आराम और परिचालन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेल के चल रहे कार्यों में एक प्रमुख कदम है।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया कि लंबी दूरी की ट्रेनों को एलएचबी कोच में बदलने का कार्य कई चरणों में किया गया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, लंबी दूरी की छह जोड़ी ट्रेनों को पारंपरिक आईसीएफ से आधुनिक एलएचबी कोच में अपग्रेड किया गया, जबकि एलएचबी रेक के साथ लंबी दूरी की पांच जोड़ी नई ट्रेनें शुरू की गईं। इसके अलावा, मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान, रानीकमलापति- अगरतला- रानीकमलापति स्पेशल एक्सप्रेस जैसी ट्रेन को भी एलएचबी में बदल दिया गया, जिससे लंबी दूरी की सभी ट्रेनों को एलएचबी में बदलने की प्रक्रिया पूरी हुई।
एलएचबी कोच के उपयोग से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्री काफी लाभान्वित होते है। अत्याधुनिक जर्मन तकनीक से निर्मित एलएचबी कोच में एंटी-क्लाइंबिंग और एंटी-टेलीस्कोपिक जैसी विशेषता हैं, जो दुर्घटना की स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा को काफ़ी बेहतर बनाते हैं। ये कोच बेहतर राइड स्टेबिलिटी, कम शोर एवं वाइब्रेशन, बेहतर सस्पेंशन एवं एडवांस्ड ब्रेकिंग सिस्टम के साथ तेज़ गति पर भी चल सकते हैं। इसके अलावा, स्टेनलेस-स्टील से निर्मित इसकी संरचना, बेहतर अग्नि सुरक्षा प्रणाली और कम मेंटेनेंस की आवश्यकता से इनकी विश्वसनीयता काफी बढ़ती है। साथ ही यात्रियों को लंबी दूरी की ट्रेन यात्राओं में ज़्यादा आरामदायक, शांत और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलता है।
इस परिवर्तित योजना का सफल समापन पूसीरे द्वारा आधुनिक तकनीक अपनाने और यात्रियों को विश्वस्तरीय सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। पूसीरे की लंबी दूरी की सभी ट्रेनों के लिए पूरी तरह से एलएचबी बेड़े में बदलाव से न केवल पूर्वोत्तर और देश के बाकी हिस्सों में यात्रियों के लिए रेल यात्रा की क्वालिटी बेहतर होगी, बल्कि यह ज़्यादा कुशल और पर्यावरण के अनुकूल ट्रेन परिचालन में भी योगदान देगा। पूसीरे, ज़्यादा यात्री-अनुकूल और कुशल परिवहन प्रणाली के लिए भारतीय रेल के विज़न के अनुरूप अपने अवसंरचना और रोलिंग स्टॉक को निरंतर अपग्रेड करने को प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

