पूसीरे ने न्यू बंगाईगांव वर्कशॉप में स्टीम लोकोमोटिव 801-बी (1927) को किया पुनर्जीवित
गुवाहाटी, 24 अप्रैल (हि.स.)। भारत की समृद्ध रेल विरासत के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करते हुए, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने ऐतिहासिक स्टीम लोकोमोटिव संख्या 801-बी को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया है, जिसे मूल रूप से वर्ष 1927 में मेसर्स नॉर्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी लिमिटेड, ग्लासगो, यूके द्वारा निर्मित किया गया था।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने शुक्रवार काे बताया कि सूक्ष्मता के साथ किया गया यह नवीनीकरण न्यू बंगाईगांव वर्कशॉप में सम्पन्न किया गया है, जिसमें विरासत संरक्षण को आधुनिक तकनीकी उन्नयन के साथ समन्वित किया गया है। पुनर्स्थापित लोकोमोटिव को समकालिक वास्तविक स्टीम लोकोमोटिव ध्वनि, कृत्रिम धुएं के उत्सर्जन तथा गतिशील प्रकाश प्रभावों से सुसज्जित किया गया है, जिससे यह विंटेज मशीन दृश्य एवं श्रव्य रूप से अत्यंत आकर्षक ढंग से पुनर्जीवित हो उठी है और स्टीम युग के प्रामाणिक वातावरण का पुनर्सृजन करती है। इन उन्नयनों को ऐतिहासिक मौलिकता को बनाए रखते हुए दर्शकों के अनुभवात्मक आकर्षण को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए सावधानीपूर्वक डिज़ाइन किया गया है।
स्टीम लोकोमोटिव 801-बी प्रारंभिक 20वीं सदी की रेलवे इंजीनियरिंग की गौरवशाली विरासत का प्रतिनिधित्व करता है। इसका पुनरुद्धार रेलवे विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो रेलवे प्रेमियों, पर्यटकों तथा युवा पीढ़ी को रेल परिवहन के विकास को अनुभव करने के लिए एक आकर्षक मंच प्रदान करता है।
यह पहल भारतीय रेल के व्यापक दृष्टिकोण- विरासत संरक्षण एवं जनसहभागिताके अनुरूप है, जिसके अंतर्गत स्थिर प्रदर्शनों को इंटरैक्टिव प्रदर्शनी में परिवर्तित किया जा रहा है। उन्नत किया गया यह लोकोमोटिव पूसीरे के अंतर्गत विरासत प्रदर्शनों एवं रेलवे प्रदर्शनी में एक प्रमुख आकर्षण बनने की उम्मीद है।---------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

