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पूसीरे ने डीएचआर के शताब्दी वर्ष पुराने स्टीम इंजन 808 सी का नवीनीकरण किया

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पूसीरे ने डीएचआर के शताब्दी वर्ष पुराने स्टीम इंजन 808 सी का नवीनीकरण किया


- मालीगांव स्थित पूसीरे मुख्यालय में अपग्रेडेड विरासत प्रदर्शनी स्थापित

गुवाहाटी, 27 मई (हि.स.)। भारत की समृद्ध रेल विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) ने दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) की (4-6-2) पैसिफिक के ऐतिहासिक स्टीम इंजन संख्या 808-सी क्लास एनजी लोको का नवीनीकरण किया। इसे मालीगांव स्थित मुख्यालय परिसर में एक अपग्रेडेड विरासत प्रदर्शनी के रूप में स्थापित किया गया है।

पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बुधवार काे बताया कि इस नवीनीकृत विरासत इंजन का उद्घाटन 26 मई को पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक चेतन कुमार श्रीवास्तव ने वरिष्ठ रेल अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में किया।

यह ऐतिहासिक इंजन वर्ष 1914 में बना था और इसका निर्माण नॉर्थ ब्रिटिश लोकोमोटिव कंपनी लिमिटेड, ग्लासगो (यूके) द्वारा किया गया था। यह स्टीम इंजन भारत की रेल विरासत का एक दुर्लभ प्रतीक है। यह इंजन पहले से ही मालीगांव स्थित पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्यालय परिसर में प्रदर्शित था और अब पूर्ण मरम्मत, पेंटिंग और नवीनीकरण कार्यों के माध्यम से इसे एक नया रूप दिया गया है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक की प्रेरणा और मार्गदर्शन में, यह जीर्णोद्धार कार्य न्यू बंगाईगाँव स्थित कैरेज एंड वैगन कारखाना द्वारा किया गया। नवीनीकृत इंजन को सजावटी रोशनी के साथ-साथ वास्तविक ध्वनि और धुएं के प्रभावों से सुसज्जित किया गया है, जो इसे रेल यात्रियों और उत्साही लोगों के लिए एक आकर्षक विरासत प्रदर्शनी बनाता है।

यह स्टीम इंजन संख्या 808, प्रसिद्ध 4-6-2 पैसिफिक क्लास स्टीम लोकोमोटिव श्रेणी से संबंधित है, जिसे 1914 में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के अधीन सेवा के लिए लाया गया था। अपने जुड़वां इंजन संख्या 807 के साथ, इस इंजन ने डीएचआर के किशनगंज विस्तार सेक्शन पर 800 टन तक की मालगाड़ियों को खींचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

1948 में सिलीगुड़ी-किशनगंज लाइन को मीटर गेज में बदलने के बाद, यह इंजन 1960 के दशक में सेवामुक्त होने से पहले, सिलीगुड़ी में एक शंटिंग पायलट के रूप में अपनी सेवा जारी रखा। यह संरक्षित स्टीम इंजन अब वाष्प युग और भारतीय रेलवे की इंजीनियरिंग उत्कृष्टता की याद दिलाता है।

स्टीम इंजन संख्या 808 का जीर्णोद्धार, ऐतिहासिक रेल संपत्तियों के संरक्षण और संवर्धन के प्रति पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही भारत में स्टीम इंजन की विरासत के बारे में जागरूकता भी पैदा करता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय