पारंपरिक धान खेती से उच्च मूल्य वाली बागवानी की ओर बढ़ना होगा : पीयूष हजारिका
गुवाहाटी, 25 जून (हि.स.)। असम के कृषि, सिंचाई एवं संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए राज्य में पारंपरिक धान खेती से उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र विशेष के अनुरूप फसलों के चयन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर असम की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है।
असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज में असम कृषि विश्वविद्यालय (एएयू) तथा कृषि विभाग द्वारा आयोजित एक इंटरफेस बैठक की अध्यक्षता करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत चाय, मांस, मछली, फल और सब्जियों सहित अनेक कृषि उत्पादों का बड़े पैमाने पर निर्यात करता है, लेकिन इस क्षेत्र में असम का योगदान अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने राज्य को कृषि उत्पादन और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाने का आह्वान किया।
बैठक में कृषि वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, कृषि विज्ञान केंद्रों, नाबार्ड तथा मत्स्य, सिंचाई, पशुपालन, बागवानी और रेशम विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री ने कहा कि असम में लगभग 75 लाख लोग कृषि पर निर्भर हैं, जबकि राज्य की केवल 24 प्रतिशत कृषि भूमि ही सिंचाई सुविधाओं से आच्छादित है। उन्होंने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर जोर देते हुए अंडा, मछली, पोल्ट्री और पोर्क उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने की आवश्यकता बताई।
पीयूष हजारिका ने असम कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं से क्षेत्र-विशिष्ट फसलों के चयन तथा जलवायु अनुकूल बीज एवं पौधों के विकास के लिए मार्गदर्शन देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह संवाद मंच वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के खेतों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा तथा असम की कृषि को पारंपरिक आजीविका आधारित व्यवस्था से लाभकारी व्यावसायिक उद्यम में बदलने में सहायक बनेगा।
बैठक के उद्घाटन सत्र में कृषि विभाग की आयुक्त एवं सचिव अरुणा राजोरिया, एएयू के कुलपति दीपज्योति राजखोवा, नाबार्ड असम इकाई के मुख्य महाप्रबंधक जी रमेश कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
------------
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

