असम में एकीकृत बाढ़ प्रबंधन से दीर्घकालिक समाधान की दिशा में बढ़ रही सरकार
गुवाहाटी, 30 जून (हि.स.)। असम सरकार ने कहा है कि राज्य में बाढ़ की समस्या केवल असम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे हिमालयी नदी तंत्र से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा है। असम प्रदेश भाजपा की प्रवक्ता मीता नाथ बोरा ने मंगलवार को जारी एक बयान में कहा कि पिछले कई दशकों तक बाढ़ प्रबंधन मुख्य रूप से तटबंध निर्माण, सीमित ड्रेजिंग, राहत एवं पुनर्वास, कटाव नियंत्रण तथा मुआवजा वितरण तक ही सीमित रहा, जबकि अब सरकार दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बती पठार और युवा हिमालयी क्षेत्र से होकर गुजरती है, जिसके कारण इसमें भारी मात्रा में गाद जमा होती है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, भूटान और नगालैंड से आने वाली 50 से अधिक नदियां मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में पानी लेकर ब्रह्मपुत्र घाटी में प्रवेश करती हैं। लगातार नदी का मार्ग बदलना और तीव्र कटाव भी असम में बाढ़ की प्रमुख वजह है।
मीता नाथ बोरा ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश, भूटान और तिब्बत में होने वाली भारी वर्षा का सीधा असर असम में बाढ़ की स्थिति पर पड़ता है। वहीं, अनियोजित शहरीकरण, आर्द्रभूमियों में कमी और जल निकासी व्यवस्था के बाधित होने से गुवाहाटी सहित कई शहरों में शहरी बाढ़ की समस्या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ऊपरी क्षेत्रों में बने अधिकांश जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पादन के उद्देश्य से विकसित की गईं, जिनमें बाढ़ नियंत्रण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई।
उन्होंने बताया कि असम का लगभग 40 फीसदी भौगोलिक क्षेत्र, यानी करीब 31.05 लाख हेक्टेयर भूमि, हर वर्ष बाढ़ से प्रभावित होती है। इसे देखते हुए पिछले एक दशक में राज्य सरकार ने बाढ़ एवं कटाव प्रबंधन को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाए हैं। पिछले पांच वर्षों में लगभग 700.3 किलोमीटर नए तटबंध बनाए गए, 540.2 किलोमीटर पुराने तटबंधों को मजबूत किया गया, 320.3 किलोमीटर संवेदनशील नदी तटों पर 280 कटाव रोधी परियोजनाएं लागू की गईं तथा जल निकासी सुधारने के लिए 43 स्लूइस गेट बनाए गए। उन्होंने दावा किया कि हाल की बाढ़ के दौरान 1,240.5 किलोमीटर तटबंधों में से केवल एक तटबंध ही क्षतिग्रस्त हुआ।
बोरा ने कहा कि राज्य सरकार ने दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन के लिए असम इंटीग्रेटेड रिवर बेसिन मैनेजमेंट प्रोजेक्ट, क्लाइमेट रेजिलिएंट ब्रह्मपुत्र इंटीग्रेटेड फ्लड एंड रिवर इरोजन मैनेजमेंट प्रोजेक्ट तथा नेशनल हाइड्रोलॉजी प्रोजेक्ट जैसी महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक आंकड़ों, आधुनिक तकनीक और जलवायु अनुकूल रणनीतियों के आधार पर समग्र नदी बेसिन प्रबंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मपुत्र की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण बाढ़ की चुनौती बनी हुई है, लेकिन नई पहलें असम में टिकाऊ और प्रभावी बाढ़ प्रबंधन की मजबूत नींव रख रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

