अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ महात्मा गांधी का ‘सविनय अवज्ञा’ अपनाएं : मुख्यमंत्री
शिवसागर (असम), 04 फरवरी (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार महात्मा गांधी से प्रेरित “सविनय अवज्ञा और असहयोग” की एक सोची-समझी नीति के तहत असम में रह रहे अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ऐसे हालात बना रही है, जिनमें अवैध प्रवासियों के लिए असम में रहना असंभव हो जाए।
शिवसागर विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री महिला उद्यमिता अभियान (एमएमयूए) के तहत लाभार्थियों को सीड फंड वितरित करने के कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि असम सीमा पर प्रतिदिन 20 से 30 अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को सुरक्षा बलों द्वारा वापस धकेला जा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि औपचारिक प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर निर्वासन व्यावहारिक नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी अवैध प्रवासियों को लाइन में खड़ा कर ट्रेन से वापस भेजना संभव नहीं है, इसलिए सरकार की रणनीति यह है कि राज्य के भीतर और सीमा पर दबाव बनाया जाए ताकि वे स्वयं असम छोड़ने को मजबूर हों। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 1.5 लाख बीघा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है, जिसे अवैध रूप से बसने वालों को वापस नहीं दिया जाएगा।
हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि उनकी नीति पारंपरिक आंदोलन आधारित राजनीति से अलग है। उन्होंने दावा किया कि सरकार प्रशासनिक उपायों के जरिए अवैध प्रवासियों को जमीन, आजीविका और अन्य संसाधनों से वंचित कर रही है, जिससे उन्हें असम छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
सरकार की कार्रवाई का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजाना हो रहे पुशबैक के बावजूद अब तक किसी ने अदालत का रुख नहीं किया है। उन्होंने इसे सीमा पर सख्ती और राज्य के भीतर दबाव की दोहरी रणनीति करार दिया।
महात्मा गांधी की विचारधारा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि असहयोग और सविनय अवज्ञा गांधीजी द्वारा बताए गए दो प्रमुख सिद्धांत हैं। उन्होंने दावा किया कि यदि असमिया समाज इन सिद्धांतों को अपनाता है, तो अवैध बांग्लादेशी नागरिक स्वतः ही राज्य छोड़ देंगे।
उन्होंने जमीनी स्तर पर सामाजिक और आर्थिक असहयोग की भी अपील की, हालांकि साथ ही यह स्पष्ट किया कि अवैध प्रवासियों और स्वदेशी मुस्लिम समुदाय के बीच स्पष्ट अंतर किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री डाॅ. हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि अवैध प्रवासियों के नाम पर स्वदेशी मुसलमानों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन बांग्लादेश से आए अवैध लोगों को स्वदेशी बताकर संरक्षण भी नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन स्वदेशी मुसलमानों के उत्पीड़न का कड़ा विरोध करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

