भारत-यूके एफटीए लागू होने से पहले असम और यूके ने सहयोग के रोडमैप पर की चर्चा
गुवाहाटी, 24 जून (हि.स.)। असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने बुधवार को यहां ब्रिटिश डिप्टी हाई कमिश्नर एंड्रयू फ्लेमिंग के साथ बैठक की। इस बैठक का मकसद अगले महीने लागू होने वाले भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) से पहले असम और यूनाइटेड किंगडम के बीच सहयोग को मजबूत करना था।
बैठक में निवेश को बढ़ावा देने, निर्यात बढ़ाने, टेक्नोलॉजी को अपनाने, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने पर ध्यान दिया गया।
मुख्य सचिव के अनुसार, यह चर्चा भारत-यूके एफटीए के संदर्भ में हुई, जो 15 जुलाई, 2026 से लागू होने वाला है। उन्होंने कहा कि असम का बदलता हुआ आर्थिक माहौल यूनाइटेड किंगडम के साथ गहरे जुड़ाव के लिए बड़े अवसर पैदा करता है।
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने असम पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एपीडीसीएल) के लिए यूके पैक्ट -समर्थित बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) की ज़रूरत के आकलन और विश्लेषण की रिपोर्ट भी पेश की। इस रिपोर्ट में ग्रिड की विश्वसनीयता को मजबूत करने, रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाने की गति बढ़ाने और असम के क्लीन एनर्जी ट्रांज़िशन (स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव) में मदद करने के लिए सुझाव दिए गए हैं।
दोनों पक्षों ने गुवाहाटी में असम-यूके इंफ्रास्ट्रक्चर राउंडटेबल की योजनाओं पर भी चर्चा की। इस प्रस्तावित प्लेटफॉर्म से सस्टेनेबल शहरीकरण, ट्रांसपोर्ट, बाढ़ से निपटने की क्षमता, जलवायु-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोजेक्ट डिलीवरी में पार्टनरशिप को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसमें यूके एक्सपोर्ट फाइनेंस के साथ संभावित जुड़ाव भी शामिल है।
प्रस्तावित यूके-भारत सॉवरेन एआई पार्टनरशिप के तहत उभरते अवसरों पर भी चर्चा हुई। जिन क्षेत्रों पर बात हुई, उनमें भरोसेमंद एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉवरेन क्लाउड क्षमताएं, एडवांस्ड कंप्यूटिंग सिस्टम और एआई गवर्नेंस फ्रेमवर्क शामिल थे, जो असम की डिजिटल बदलाव की पहलों में मदद कर सकते हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि बैठक ने भारत-यूके एफटीए से मिलने वाले अवसरों को बेहतर व्यापार, निवेश, टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप और संस्थागत सहयोग के जरिए ठोस नतीजों में बदलने की साझा प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।
फ्लेमिंग ने एफटीए लागू होने से पहले इस बैठक को सही समय पर हुई बैठक बताया और कहा कि चर्चा में इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कौशल विकास, खेल, माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई), जलवायु और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्र शामिल थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

