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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर धुबड़ी में विरासत यात्रा आयोजित, शहर की ऐतिहासिक धरोहर से रूबरू हुए लोग

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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर धुबड़ी में विरासत यात्रा आयोजित, शहर की ऐतिहासिक धरोहर से रूबरू हुए लोग


धुबड़ी (असम), 08 मार्च (हि.स.) । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रविवार को निचले असम के धुबड़ी जिला मुख्यालय में एक विशेष विरासत यात्रा (हेरिटेज वॉक) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शहर की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को सामने लाना तथा स्थानीय समुदाय को अपने इतिहास से जोड़ना था।

इस विरासत यात्रा का आयोजन अभिज्ञा ई-म्यूज़ियम द्वारा किया गया, जिसमें शहर के कई प्रमुख व्यक्तियों ने नेतृत्व किया। यात्रा में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें छात्र-छात्राएं, इतिहास और विरासत के प्रति रुचि रखने वाले लोग तथा स्थानीय निवासी शामिल थे। लगभग तीन किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा ने प्रतिभागियों को धुबड़ी के ऐतिहासिक इलाकों से परिचित कराया।

यह पदयात्रा टेटोलतला स्थित विक्टोरिया स्टैच्यू से शुरू हुई और शहर के कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों से होकर गुजरी। इन स्थलों के माध्यम से धुबड़ी के उस अतीत को समझने का अवसर मिला, जिसे औपनिवेशिक प्रशासन, धार्मिक विविधता और ब्रह्मपुत्र घाटी के सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने आकार दिया है।

यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को औपनिवेशिक काल की उन इमारतों के बारे में जानकारी दी गई, जो ब्रिटिश शासन के समय शहर की प्रशासनिक और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र थीं। विरासत यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण ऐतिहासिक पांच पीर दरगाह रहा, जो पांच मुस्लिम संतों से जुड़ा एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल है और सामुदायिक सद्भाव की परंपरा के लिए जाना जाता है।

इसके बाद समूह ने ऐतिहासिक धुबड़ी गुरुद्वारा साहिब का भी दौरा किया, जिसका संबंध सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेगबहादुर की यात्रा से माना जाता है। यह स्थल सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थस्थल है। यात्रा के दौरान ब्रह्मा मंदिर भी प्रमुख पड़ावों में शामिल रहा, जिसका संबंध ब्रह्म समाज आंदोलन से बताया जाता है। इस आंदोलन ने 19वीं और 20वीं शताब्दी के दौरान असम के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाला था।

पूरी यात्रा के दौरान आयोजकों और मार्गदर्शकों ने धुबड़ी के विकास से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं और कम प्रसिद्ध कहानियों को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित होने के कारण धुबड़ी कभी एक महत्वपूर्ण नदी व्यापार केंद्र के रूप में विकसित हुआ, जिसने असम को बंगाल और पूर्वी भारत के अन्य हिस्सों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई।

आयोजकों ने कहा कि इस तरह की विरासत यात्राएं लोगों को अनुभवात्मक तरीके से सीखने का अवसर देती हैं। इससे प्रतिभागी अपने आसपास मौजूद ऐतिहासिक स्थलों के महत्व को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं और रोजमर्रा की जगहों में छिपी वास्तुकला तथा सांस्कृतिक कहानियों की सराहना कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन इस कार्यक्रम का आयोजन प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि विरासत संरक्षण, शोध और दस्तावेजीकरण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

कार्यक्रम के अंत में एक संवाद सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने धुबड़ी की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण तथा युवाओं के बीच विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। कई प्रतिभागियों ने कहा कि इस मार्गदर्शित यात्रा ने उन्हें अपने शहर के परिचित स्थलों को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान किया।------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय