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असम में एमबीबीएस फीस वृद्धि का स्वास्थ्य मंत्री ने किया बचाव, कहा- निजी मेडिकल कॉलेजों से काफी कम है फीस

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असम में एमबीबीएस फीस वृद्धि का स्वास्थ्य मंत्री ने किया बचाव, कहा- निजी मेडिकल कॉलेजों से काफी कम है फीस


गुवाहाटी, 24 अक्टूबर (हि.स.)। असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने शनिवार को राज्य सरकार के एमबीबीएस पाठ्यक्रम की फीस बढ़ाने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि संशोधित फीस निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सोच-समझकर फीस बढ़ाने का निर्णय लिया है और नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के परिवार की वार्षिक आय के आधार पर फीस निर्धारित की गई है।

गुवाहाटी में आयोजित आज संवाददाता सम्मेलन में सिंघल ने कहा कि निजी मेडिकल संस्थानों में चिकित्सा शिक्षा पर लगभग 40 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, जबकि राज्य सरकार ने फीस में अपेक्षाकृत मामूली वृद्धि की है।

उन्होंने कहा कि निजी संस्थानों में लोगों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए करीब 40 लाख रुपये देने पड़ते हैं। इसके मुकाबले राज्य सरकार ने फीस में बहुत कम वृद्धि की है।

संशोधित शुल्क संरचना के अनुसार, जिन विद्यार्थियों के परिवार की वार्षिक आय 9 लाख रुपये से अधिक है, उन्हें प्रति वर्ष एक लाख रुपये फीस देनी होगी। वहीं, 4 लाख से 9 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को सालाना 50,000 रुपये देने होंगे। जिन परिवारों की वार्षिक आय 4 लाख रुपये से कम है, उनके विद्यार्थियों के लिए फीस 5,000 रुपये प्रतिवर्ष निर्धारित की गई है।

यह व्यवस्था परिवार की आर्थिक स्थिति के आधार पर विद्यार्थियों पर फीस का बोझ तय करती है। गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के विद्यार्थियों को सबसे कम फीस देनी होगी।

इस बीच, स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य में किफायती चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष असम में लगभग 33 से 34 किडनी प्रत्यारोपण किए गए थे। प्रत्येक प्रत्यारोपण पर 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक खर्च आया था। उनके अनुसार, इन प्रक्रियाओं का खर्च प्रधानमंत्री आरोग्य निधि और मुख्यमंत्री आरोग्य निधि योजनाओं के तहत वहन किया गया।

सिंघल ने बताया कि पिछले तीन महीनों में राज्य में 30 से अधिक नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए गए हैं। इससे किडनी संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उपचार की बेहतर सुविधा मिल रही है।

मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि सरकार एक ओर चिकित्सा शिक्षा की फीस निर्धारित करने और दूसरी ओर आम लोगों को सस्ती विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है। हालांकि, एमबीबीएस फीस में वृद्धि और विभिन्न आय वर्गों के विद्यार्थियों पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश