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असम विधानसभा चुनाव 2026: नवगठित हाजो-शुवालकुची सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला संभव

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असम विधानसभा चुनाव 2026: नवगठित हाजो-शुवालकुची सीट पर भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला संभव


कामरूप, 08 मार्च (हि.स.)। असम विधानसभा चुनाव 2026 के करीब आते ही राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नवगठित 30 नंबर हाजो-शुवालकुची विधानसभा क्षेत्र में भी चुनावी माहौल गर्म होने लगा है। पहले मौजूद हाजो विधानसभा क्षेत्र को समाप्त कर इस बार नये परिसीमन के तहत हाजो-शुवालकुची क्षेत्र का गठन किया गया है। कामरूप (ग्रामीण) जिले के अंतर्गत आने वाला यह क्षेत्र इस बार अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किया गया है।

नये परिसीमन के बाद इस विधानसभा क्षेत्र की संरचना में बड़ा बदलाव आया है। पूर्व के जालुकबाड़ी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शुवालकुची का एक बड़ा हिस्सा अब हाजो-शुवालकुची में शामिल कर लिया गया है। वहीं कुछ गांवों को काटकर नजदीकी कमलपुर क्षेत्र को रंगिया विधानसभा क्षेत्र में शामिल किया गया है। शुवालकुची का बड़ा इलाका इस क्षेत्र में जुड़ने के कारण राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सत्तारूढ़ भाजपा की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

हालांकि इस निर्वाचन क्षेत्र में अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या भी काफी अधिक है, जिसके चलते कांग्रेस पार्टी भी इसे अपने लिए सकारात्मक अवसर के रूप में देख रही है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में पूर्व हाजो विधानसभा क्षेत्र पर पहली बार भाजपा ने कब्जा जमाया था। 2021 के चुनाव में भी भाजपा की सुमन हरिप्रिया ने कांग्रेस के दुलु अहमद को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2011 में तृणमूल कांग्रेस के दीपेन पाठक ने यहां जीत हासिल की थी।

वर्ष 1951 से 2001 के बीच यह सीट लंबे समय तक कांग्रेस के प्रभाव में रही। इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व असम के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने भी किया है। विष्णुराम मेधी ने 1951, 1957 और 1967 में यहां से जीत दर्ज की थी। वहीं महेंद्र मोहन चौधरी ने 1958 के उपचुनाव और 1962 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था।

इसके अलावा 1996 और 2006 में अखिल भारतीय संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (एआईयूडीएफ) के नूरुल हक यहां से विधायक चुने गए थे। 2016 से अब तक भाजपा की सुमन हरिप्रिया इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। लेकिन सीट के पुनर्गठन और इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किए जाने के कारण उनके लिए इस बार चुनाव लड़ने की संभावना नहीं के बराबर मानी जा रही है।

पहले इस क्षेत्र में क्षेत्रीय दल असम गण परिषद (अगप) का प्रभाव भी रहा था, लेकिन वर्तमान समय में यहां मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच ही राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल रहा है। परिसीमन के बाद राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं।

भाजपा की ओर से संभावित उम्मीदवारों में पूर्व आसू नेता प्रकाश दास, सनातन दास और डॉ. वेदभरत पाठक जैसे नाम चर्चा में हैं। इसके अलावा सेवानिवृत्त परिवहन अधिकारी गौतम दास भी सक्रिय रूप से चुनावी तैयारियों में जुटे हुए बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस की ओर से बोको विधानसभा क्षेत्र की मौजूदा विधायक नंदिता दास ने इस क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। परिसीमन के बाद बोको और छयगांव क्षेत्रों को मिलाकर नया क्षेत्र बनाया गया है और उसे अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया है, जिसके कारण नंदिता दास का पुराना क्षेत्र समाप्त हो गया है। ऐसे में उन्होंने अब हाजो-शुवालकुची सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। अभिनेता हिरण्य दास भी कांग्रेस के संभावित उम्मीदवार के रूप में प्रयासरत बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार यहां कांग्रेस की नंदिता दास और भाजपा के प्रकाश दास के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा इस सीट को तीसरी बार अपने कब्जे में रख पाती है या नहीं।

इस बीच अनुसूचित जाति संगठनों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि कुछ लोग रातों-रात अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र हासिल कर आरक्षित सीटों से टिकट पाने की कोशिश करते हैं। ऐसे नेताओं पर संगठनों ने नाराजगी जताई है।

संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी राजनीतिक दल ने फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र वाले उम्मीदवार को टिकट दिया, तो उसका विरोध किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर ऐसे उम्मीदवारों के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी भी उतारे जाएंगे।

सूत्रों के अनुसार हाजो-शुवालकुची क्षेत्र से अनुसूचित जाति संग्रामी युवा परिषद के अध्यक्ष संजीव दास को भी स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने की तैयारी की जा सकती है।

कुल मिलाकर, नये परिसीमन के बाद बने इस विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण, अल्पसंख्यक मतदाताओं की भूमिका और प्रमुख दलों की रणनीति चुनाव को बेहद रोचक बनाने वाली है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की आधिकारिक घोषणा के साथ ही यहां की राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट होने की संभावना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय