हिमालय भारत की सभ्यतागत विरासत और देशभक्ति का प्रतीक : राज्यपाल आचार्य
गुवाहाटी, 09 अक्टूबर (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शुक्रवार को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों के साहस, बलिदान और कर्तव्यनिष्ठा को नमन् करते हुए कहा कि वे अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बीच देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले वीर प्रहरी हैं।
सोनापुर स्थित डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘हिमालय की गोद में, हिमालय की ऊंचाई में’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने देश की सीमाओं की सुरक्षा में आईटीबीपी के जवानों, जिन्हें हिमवीर कहा जाता है, के योगदान की सराहना की। यह कार्यक्रम असम लोक भवन की पहल ‘नमो मातृभूमि सुरक्षा एवं स्वावलंबन संकल्प सप्ताह’ के तहत आईटीबीपी द्वारा आयोजित किया गया।
आचार्य ने कहा कि हिमालय केवल भारत की भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय गौरव का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी के जवानों की सतर्कता, अनुशासन और देशभक्ति सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाती है तथा मातृभूमि के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आईटीबीपी के आदर्श वाक्य ‘शौर्य, दृढ़ता, कर्मनिष्ठा’ का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वीरता, दृढ़ संकल्प और कर्तव्य के प्रति समर्पण इस बल की विशिष्ट सेवाओं का आधार हैं। उन्होंने आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता तथा हिमालय के दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के कल्याण में आईटीबीपी की भूमिका की भी सराहना की।
राज्यपाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में आधुनिक तकनीक, व्यावसायिक दक्षता और स्वदेशी क्षमताओं के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने जवानों को आश्वस्त किया कि राष्ट्र उनकी सेवाओं और बलिदानों का सम्मान करता है।
असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र के सामरिक महत्व का उल्लेख करते हुए आचार्य ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास राष्ट्र निर्माण के एक-दूसरे के पूरक स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित, समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लक्ष्य को हासिल करने में सुरक्षा बलों की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।
युवा अधिकारियों और जवानों से देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के प्रति समर्पित रहने का आह्वान करते हुए राज्यपाल ने उनसे अपने अनुशासन, साहस और देशभक्ति से भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनने की अपील की। उन्होंने मां कामाख्या से हिमवीरों और उनके परिवारों की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य तथा कल्याण की कामना भी की।
कार्यक्रम में आईटीबीपी के अतिरिक्त महानिदेशक अखिलेश सिंह रावत, महानिरीक्षक क्ले खोंगसाई और मंदिर एक्का, उपमहानिरीक्षक सचिन मित्तल और हरीश कुमार, डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय के कुलपति फादर जोस पलेली, कुलसचिव डॉ. जेकरियास जॉर्ज, पूर्व सैनिक एलटी स्वान थांग, सैन्य अधिकारी, आईटीबीपी के जवान, वीर नारियां, पूर्व सैनिक, विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

