असम के राज्यपाल ने कश्मीरी युवाओं से की बातचीत
गुवाहाटी, 17 जनवरी (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शनिवार काे लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में कश्मीर घाटी के 25 छात्रों से बातचीत की, जो 13 बटालियन, एसएसबी, डिग्निबल (जे एंड के) द्वारा आयोजित भारत दर्शन यात्रा पर हैं।
भारत की 'विविधता में एकता' की भावना पर प्रकाश डालते हुए, राज्यपाल ने कहा कि भाषाएं, खान-पान की आदतें, पहनावा और परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन संविधान, लोकतंत्र और साझा राष्ट्रीय मूल्य लोगों को एक साथ बांधते हैं। उन्होंने कहा कि एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना सिर्फ एक नारा नहीं है, बल्कि जीवन जीने का एक तरीका है, और भारत दर्शन जैसे कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच भावनात्मक बंधन को मजबूत करने और आपसी समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार असम में छात्रों का स्वागत करते हुए, लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उनकी यात्रा पर खुशी जताई और उनके उत्साह और सीखने की भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि हालांकि कश्मीर और असम भौगोलिक रूप से दूर हैं, लेकिन वे एक राष्ट्र, भारत के अभिन्न अंग के रूप में भावनात्मक और सांस्कृतिक रूप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों की उपस्थिति देश की एकता का एक मजबूत प्रतीक है।
गौरतलब है कि, भारत दर्शन कार्यक्रम हर साल केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) जैसे एसएसबी, सीआरपीएफ, बीएसएफ और अन्य द्वारा जम्मू और कश्मीर पुलिस के सहयोग से सिविक एक्शन प्रोग्राम के तहत आयोजित किया जाता है। इस पहल का मकसद कश्मीरी युवाओं को देश भर के प्रमुख शहरों और ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा कराकर भारत की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शैक्षिक विविधता से परिचित कराना है।
राज्यपाल ने कश्मीर और असम के बीच सांस्कृतिक समानताओं के बारे में भी बात की, जिसमें बड़ों का सम्मान, कला, संगीत और हस्तशिल्प के प्रति प्रेम, प्रकृति के साथ घनिष्ठ संबंध और सामुदायिक जुड़ाव की मजबूत भावना शामिल है। उन्होंने आधुनिकता को अपनाते हुए सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में असम के योगदान पर भी प्रकाश डाला, स्वतंत्रता संग्राम से लेकर रक्षा, सुरक्षा, प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता तक, यह देखते हुए कि यह राज्य सद्भाव, सहिष्णुता और लचीलेपन का प्रतीक है।
लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने यह भी कहा कि युवा न केवल भारत का वर्तमान हैं, बल्कि भविष्य भी हैं, और राष्ट्र के सच्चे निर्माता हैं। उन्होंने उन्हें असम के अपने सकारात्मक अनुभवों को अपने परिवारों और दोस्तों के साथ साझा करने और शांति, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के दूत के रूप में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। विकास में युवाओं की भूमिका पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा, इनोवेशन, अनुशासन और कर्तव्य की भावना राष्ट्र निर्माण की नींव हैं।
राज्यपाल ने कहा कि आज भारत युवाओं को शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता, स्टार्ट-अप और खेल के क्षेत्र में असीमित अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए लगातार काम कर रही है, और छात्रों से इन अवसरों का ज़्यादा से ज़्यादा लाभ उठाने और अपनी आकांक्षाओं को हकीकत में बदलने का आग्रह किया।
यह कहते हुए कि भारत एक आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है, आचार्य ने कहा कि इस यात्रा में हर क्षेत्र और हर युवा नागरिक की समान भूमिका है। उन्होंने यह उम्मीद जताते हुए अपनी बात खत्म की कि भारत दर्शन यात्रा जीवन भर की दोस्ती की नींव रखेगी, राष्ट्र की भावनात्मक एकता को मज़बूत करेगी और छात्रों के जीवन में नई ऊर्जा और दिशा का संचार करेगी। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
डीआईजी एसएसबी गुवाहाटी फ्रंटियर नीरज चंद युवाओं के साथ लोक भवन पहुंचे थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

