राज्यपाल ने श्रीश्री सियाला वैष्णव देवमोर्नोई सत्र का किया दौरा, जन्माष्टमी उत्सव में हुए शामिल
गुवाहाटी, 04 सितंबर (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शुक्रवार काे दरंग जिले में ऐतिहासिक श्रीश्री सियाला वैष्णव देवमोर्नोई सत्र का दौरा किया और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के समारोह में भाग लिया।
इस मौके पर भक्तों को संबोधित करते हुए, राज्यपाल ने कहा कि दरंग असम की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से समृद्ध है। उन्होंने वैष्णव आंदोलन और ऐतिहासिक पत्थरूघाट की लड़ाई के साथ इसके लंबे जुड़ाव को याद किया।
जन्माष्टमी पर सभी भक्तों को बधाई देते हुए, आचार्य ने भगवान कृष्ण के दार्शनिक मूल्यों - जैसे धर्म, भक्ति, प्रेम, कल्याण और मानव उत्थान को आगे बढ़ाने में महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव के गहरे प्रभाव और असम के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में उनके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव और मानवीय एकता के बारे में शंकरदेव का समावेशी दृष्टिकोण आज भी बहुत प्रासंगिक है। राज्यपाल ने सत्रों और नामघरों को 'हमारी संस्कृति के स्कूल, हमारी आध्यात्मिक चेतना के केंद्र, हमारी कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक और सामाजिक सद्भाव के स्तंभ' बताते हुए कहा कि असम की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और युवा पीढ़ी को उसकी जड़ों से जोड़े रखने में इनकी भूमिका बहुत अहम है।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी और विरासत भी' के विज़न का ज़िक्र करते हुए आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के बीच तालमेल बिठाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि बटाद्रवा थान सांस्कृतिक परियोजना, मां कामाख्या मंदिर एक्सेस कॉरिडोर और लचित बोरफुकन की विरासत के विकास और संरक्षण की पहल, विकास और विरासत दोनों को आगे बढ़ाने के प्रति असम की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आचार्य ने युवाओं से असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं से ज़्यादा जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को आधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ मूल्यों और विरासत से भी जुड़ा रहना चाहिए। उन्होंने सत्रों और नामघरों की आध्यात्मिक भावना को समाज सेवा की व्यापक पहलों से जोड़ने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।
राज्यपाल ने कहा कि जन्माष्टमी समाज को भगवान कृष्ण के सही काम, कर्तव्य, भक्ति और मानवता की सेवा के संदेश की याद दिलाती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि असम की आध्यात्मिक परंपराएँ शांति, सद्भाव और सामाजिक एकता को मज़बूत करती रहेंगी और 'विकसित भारत' की यात्रा में योगदान देंगी।
आचार्य ने ऐतिहासिक सत्र की समृद्ध वैष्णव विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में अपनी भूमिका के लिए सत्राधिकार, भक्तों और स्थानीय लोगों को बधाई दी और श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर सभी को शुभकामनाएं दीं।
इस कार्यक्रम में पशुपालन और पशु चिकित्सा मंत्री नीलिमा देवी, विधायक डॉ. परमानंद राजबंशी, दरंग की ज़िला आयुक्त आयुषी जैन, श्री श्री शियाला वैष्णव देवमोर्नोई सत्र के अध्यक्ष ध्रुवकांत शर्मा, देवमोर्नोई डिग्री कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. गीताली कलिता, सत्र के सत्राधिकार और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।
साझेदार संगठनों में गुगल एआई, आईआईटी मद्रास – बोधन एआई, एलईएचएस – वाधवानी एआई, फाउंडेशन टू एजुकेट गर्ल्स ग्लोबली (एजुकेट गर्ल्स), एकस्टेप – एक्सएल, कैनवा शिक्षा शामिल हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

