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राज्यपाल ने भारतीय वायुसेना के शौर्य और तकनीकी क्षमता को सराहा, युवाओं से बड़े सपने देखने का किया आह्वान

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राज्यपाल ने भारतीय वायुसेना के शौर्य और तकनीकी क्षमता को सराहा, युवाओं से बड़े सपने देखने का किया आह्वान


गुवाहाटी, 16 अक्टूबर (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शुक्रवार को भारतीय वायुसेना के शौर्य, तकनीकी दक्षता और मानवीय योगदान की सराहना करते हुए युवाओं से बड़े सपने देखने तथा देश के एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्र की प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया।

राज्यपाल ने गुवाहाटी के बोरझार स्थित वायुसेना मुख्यालय में आयोजित ‘आकाश से अंतरिक्ष तक’ कार्यक्रम में भाग लिया। लोक भवन, असम की पहल पर भारतीय वायुसेना द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम नमो मातृभूमि सुरक्षा एवं स्वावलंबन संकल्प सप्ताह के अंतर्गत आयोजित किया गया।

इस अवसर पर आचार्य ने देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा में भारतीय वायुसेना के जवानों के साहस, समर्पण और बलिदान की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रसेवा में अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा वायुसेना के अधिकारियों, वायुसैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने कहा कि भारतीय वायुसेना का योगदान केवल युद्ध अभियानों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपदा राहत, बचाव कार्यों तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने वायुसेना की कार्यकुशलता, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को प्रेरणादायक बताया।

महिला सशक्तीकरण पर जोर देते हुए आचार्य ने वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला अधिकारियों और लड़ाकू विमान चालकों की सफलता नारी शक्ति का सशक्त उदाहरण है। उनकी उपलब्धियां नई पीढ़ी की लड़कियों को चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

आधुनिक युद्ध में तकनीक की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उन्नत लड़ाकू विमान, अत्याधुनिक रडार प्रणाली, ड्रोन तकनीक और नेटवर्क आधारित क्षमताएं हवाई अभियानों की प्रकृति को बदल रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, नवाचार और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई गति दी है, जिससे देश की सुरक्षा तैयारियां मजबूत हुई हैं।

ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए आचार्य ने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए परिचालन तैयारियों, उन्नत तकनीक के प्रभावी उपयोग तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों की शक्ति केवल उनकी युद्ध क्षमता में ही नहीं, बल्कि अनुशासन, आपसी तालमेल, संयम और राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता में भी निहित है।

कार्यक्रम में शामिल विद्यार्थियों से संवाद करते हुए राज्यपाल ने आकाश और अंतरिक्ष के महत्व, एयरोस्पेस तकनीक के बदलते स्वरूप तथा विमानन से अंतरिक्ष तक भारत की यात्रा में उभरते अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक जिज्ञासा विकसित करने, तकनीकी कौशल बढ़ाने और दृढ़ संकल्प के साथ नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।

राज्यपाल ने युवाओं से सशस्त्र बलों के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए परिश्रम, साहस, टीम भावना और जिम्मेदारी के मूल्यों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, समर्पण और प्रतिबद्धता राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाकर देश की रक्षा और एयरोस्पेस क्षमताओं को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।

आचार्य ने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय वायुसेना उत्कृष्टता के नए शिखर हासिल करती रहेगी और विश्व की अग्रणी वायुसेनाओं में अपनी स्थिति और मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि वायुसैनिकों का शौर्य देश के लिए गर्व का विषय है और उनकी सतर्कता भारत की सुरक्षा का मजबूत आधार है।

कार्यक्रम में 19 विंग के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर कंचन कुमार, भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, वायुसैनिक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश